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प्रेम स्पंदन .....

प्रेम स्पंदन ....

नयन आलिंगन.....
अपरिभाषित और अलौकिक.....
प्रेम स्पंदन//

मौन आवरण में ....
अधरों का अधरों से....
मधुर अभिनंदन//

महकें स्वप्न....
नेत्र विला में....
जैसे महके.....
हरदम चंदन//

मेघ वृष्टि की.....
अनुभूति को ....
कह पाये न....

प्रेम अगन में....
भीगा ये तन//

विछोह वेदना में....
नयन सागर के.....
तोड़ किनारे....

सुर्ख कपोलों पर दो बूंदें.....
पिया मिलन को .....
करती क्रन्दन//

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 923

Comment

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Comment by Sushil Sarna on July 4, 2014 at 1:59pm

आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा  जी रचना पर आपकी आत्मीय  अभिव्यक्ति का हार्दिक आभार 

Comment by Sushil Sarna on July 4, 2014 at 1:58pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी  जी रचना पर आपकी स्नेहिल अभिव्यक्ति का हार्दिक आभार  

Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 4, 2014 at 1:28pm

आदरणीय शुशील जी .

मेघ वृष्टि की.....
अनुभूति को ....
कह पाये न....

प्रेम अगन में....
भीगा ये तन//

.संदर शब्दों से सुसज्जित भाव मई इस रचना के लिए तहे दिल बधाई सादर ..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 4, 2014 at 11:52am

आदरणीय , सुन्दर शब्द संयोजन , सुन्दर विरह गीत के लिये बधाई ॥

Comment by Sushil Sarna on July 3, 2014 at 9:26pm

आदरणीय  रमेश कुमार चौहान जी  रचना पर आपकी मधुर  अभिव्यक्ति  का हार्दिक आभार 

Comment by रमेश कुमार चौहान on July 3, 2014 at 8:19pm

बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिये

Comment by Sushil Sarna on July 2, 2014 at 9:08pm

आदरणीय Priyanka singhजी  रचना पर आपकी मधुर  अभिव्यक्ति  का हार्दिक आभार 

Comment by Priyanka singh on July 2, 2014 at 4:56pm

विछोह वेदना में....
नयन सागर के.....
तोड़ किनारे....

सुर्ख कपोलों पर दो बूंदें.....
पिया मिलन को .....
करती क्रन्दन//

वाह सर बहुत खूब .....बधाई आपको 

Comment by Sushil Sarna on July 2, 2014 at 12:01pm

आदरणीय vijay nikoreजी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार 

Comment by Sushil Sarna on July 2, 2014 at 12:00pm

आदरणीय  savitamishra   जी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा  का हार्दिक आभार 

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