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इक दिन अपना नाम बताकर !

इक दिन अपना नाम बताकर !
हँसती है वो आँख चुराकर!!

पत्थर का है शहर जानलो!
घर से निकलना सर बचाकर !!

तेरी गर मासूका ना हो !
खुद को ही खत रोज़ लिखाकर!!

मुझको खुद से दूर कर दिया!
इतना अपने पास बुलाकर !!

इक दिन वो सुन लेगा तेरी !
बस तू जाके रोज़ कहाकर!!
********************
राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by ram shiromani pathak on August 14, 2014 at 11:20am

हार्दिक आभार पवन भाई

Comment by Pawan Kumar on August 14, 2014 at 10:45am

सुन्दर रचना

Comment by ram shiromani pathak on August 13, 2014 at 5:43pm

हार्दिक आभार आदरणीया मीना दी...............   सादर 

Comment by Meena Pathak on August 13, 2014 at 2:24pm

बहुत सुन्दर 

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