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खुशियों की तारीख

खुशियों की तारीख

अस्पताल के हृदय-वार्ड में वो दम्पति उदास और गमगीन बैठा था |रह-रह कर उनके गलों से आँसू नीचे ढलक रहे थे |दीवाली और तीन साल की इकलौती बेटी के जन्मदिन में शामिल ना हो पाने की कसक ने उनके अंदर चक्रवात ला दिया था |स्त्री के हृदय-आपरेशन के बाद आई विसंगतियों के कारण वे घर से 250 किमी दूर यहाँ बेटी को एक पड़ोसी के यहाँ छोडकर पड़े थे | राम जी को जब सारी स्थिति पता चली तो वो दम्पति के पास पहुँचे और पति के काँधे पर हाथ रखकर समझाया –ये सही रहीं तो जीवन की कितनी ही दिवाली सपरिवार मनाओगे और रही जन्मदिन की बात ,बच्ची छोटी है ,उसे ख़ुशी चाहिए तिथि से क्या लेना ,अब ना सही अगले महीने इसी तारीख को मना लेना,ये भी स्वस्थ हो जाएंगी तब तक |

“शुक्रिया मास्टर जी! हम तिथियों और दिनों में खुशियाँ ढूढ़ रहे थे पर खुशियाँ तो अपनों के साथ उनके खुश रहने में हैं |हम बिटिया का जन्मदिन जरुर मनाएँगे ,अगले महीने इसी तारीख को “अब वे शांत और संतुष्ट थे |

C-@-सोमेश कुमार

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 1, 2014 at 9:22am

परिस्थितियों से समझोता कर, अपनी छोटी-बड़ी खुशियों को बरक़रार रखना ही सफल जीवन है. बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय सोमेश जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 1, 2014 at 5:45am

आदरनीय सोमेश भाई , जीवन की सही सीख देती आपकी इस रचना के लिये दिली बधाइयाँ स्वीकार करें , मास्टर जी की सीख सोला आने सही है ।

कृपया ध्यान दे...

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