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गली में खेलती वो लड़की

गली में खेलती वो लड़की
================
गली में खेलती वो लड़की
कई आँखों के केंद्र में है |
कुछ आँखों के लिए वो सरसरी भर है
कुछ दूरबीन लगाए बैठी हैं
देखती रहती हैं 
उसकी हर छोटी-बड़ी चपलता 
कुछ आँखों के लिए वो किरकिरी है
लगातार बदलती हवा का

दुष्परिणाम 
इतनी बड़ी लड़की का गली में खेलना..
मतलब, उसे गलत दिशा में धकेलना है !
अच्छा नहीं होता 
लड़कियों को इतनी छूट का मिलना 
इसीकारण, उसकी माँ उसे देती रहती है नसीहतों के घूँट |
कुछ आँखे चिंतातुर हैं 
इन स्थितियों के विरुद्ध  
रोकना नहीं चाहतीं 
हंसती-खेलती लड़की को
वो प्रहरी की तरह आगे-पीछे रहना चाहती हैं |
आखिर कितनी लड़कियाँ गली में खेल पाती हैं ?

.

सोमेश कुमार (मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 533

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 31, 2014 at 4:49pm

इस रचना के लिए हार्दिक बढ़ाई स्वीकार करें ...सोचने को विवश करती शानदार रचना  सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 30, 2014 at 11:39pm

इस रचना के आलोक में प्रयासरत रहें.. उम्दा कहन.. उम्दा संप्रेषण..

शुभ-शुभ

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on October 30, 2014 at 2:55pm

विषय का चयन अच्छा है i  प्रयास अच्छा  है और अच्छा है सन्देश i

Comment by umesh katara on October 30, 2014 at 9:34am

उत्तम रचना के लिये तहेदिल से शुक्रिया राजेश जी आपको

Comment by vijay nikore on October 29, 2014 at 3:48pm

इस अच्छी रचना के लिए बधाई।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 29, 2014 at 11:55am

बहुत अच्छा विषय चयन ...विचारणीय है  ...तथा इस पर आपका प्रयास भी सराहनीय  है बहुत- बहुत बधाई आपको सोमेश जी  

Comment by vandana on October 29, 2014 at 4:45am

वाह !!! बहुत सुन्दर रचना  आदरणीय बहुत २ बधाई 

Comment by somesh kumar on October 27, 2014 at 10:19pm

रचना पढ़ने -पसंद करने के लिए साधुवाद ,विषय -चयन अवश्य मेरा है पर रचना को कविता बनाने के लिए आदरणीय सौरभ पांडे जी के मार्गदर्शन का विशेष योगदान हैं |इसलिए बधाई और साधुवाद उनके चरणों में |

Comment by Shyam Narain Verma on October 27, 2014 at 3:38pm

" अच्छी प्रस्तुति आदरणीय ,बधाई ................. "

Comment by Dr.sandhya tiwari on October 27, 2014 at 12:58pm
Nitant bhavparak rachana ke liye sadhuwad

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