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     मानसिकता

“ सुना है ,कल छठ की गजटेड छुट्टी है ? ” मिस कामिनी ने चिप्स मुँह में भरते हुए कहा

“जी |”

“ अच्छा है एक और दिन आराम को मिला पर किसी और पर्व पे करनी चाहिए थी इसीलिए तो इन लोगों की तादाद बढ़ती जा रही है दिल्ली में - - - “उन्होंने गिरे हुए चिप्स को पैरों से रौंदते हुए कहा |

“तो कहाँ जाएँगे ये लोग !क्या ये देश/शहर इनका नही हैं ?”

“वहीं रहें ,सिर्फ उतने आने दिए जाएँ जिससे गंदगी ना हो और हमे लेबर वगैरह आराम से मिलते रहें “उन्होंने खाली पैक्ट वहीं फैंक दिया |

“ वैसे आप के पति भी तो दिल्ली के नहीं हैं ना ! “

“ पर वो तो गजटेड अफसर हैं उनसे आप इनकी तुलना ना करें | “उन्होंने झेपते हुए जवाब दिया

 खाली पैक्ट उड़कर उनके पेट से टकराया और फिर जमीन पर आ गिरा |

C-@-सोमेश कुमार(मौलिक एवं अप्रकाशित ) 

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प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 3, 2014 at 10:42am

क्या कहने हैं भाई सोमेश कुमार जी, मानसिकता शीर्षक को लघुकथा के माध्यम से बखूबी परिभाषित किया है, हार्दिक बधाई।

Comment by Shubhranshu Pandey on November 2, 2014 at 7:45pm

आदरणीय सोमेश जी,

चिप्स के पैकेट को ले कर सुन्दर व्यंग्य कहा है. गंदगी मानसिक होती है जो व्यवहार में परिणत हो कर बाहर आती है.

सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 1, 2014 at 7:55am

आ. सोमेश भाई , बढिया व्यंग्य लघुकथा कही है , दिली बधाइयाँ स्वीकार करें । अग्रजों  की सलाह पर ध्यान देते रहियेगा , रचना निखरते जायेगी । 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 30, 2014 at 11:31pm

लघुकथा से निस्सृत व्यंग्य को महसूस किया जा सकता है.

धीरे-धीरे कथानक में कसावट आती जायेगी. आपके कहे की आगे भी प्रतीक्षा रहेगी. 

शुभेच्छाएँ

Comment by somesh kumar on October 30, 2014 at 9:39pm

मार्गदर्शन एवं आशीष के लिए आभर ,आदरणीय  डा गोपाल नरायन श्रीवास्तव जी ,इस वाक्य को जोड़ने के पीछे अपने स्वार्थ पर लगने वाली ठेस को जताना है | चिप्स खाने-मसलने और पैक्ट को फैकने में आनन्द है पर उसके बिना स्वाद ,ताजगी और उदर-पूर्ति खतरे में है |फिर भी अगर आप अंत के लिए कोई अन्य वाक्य सुझाएँ तो स्वागत है 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on October 30, 2014 at 3:20pm

मित्र कथानक अच्छा है i सन्देश व्यंग्य सब अच्छा है पर लघु कथा में अनावश्यक विस्तार नहीं चाहिए i खाली पैकेट उनके पेट से टकराया----=== वाक्य प्रक्षिप्त सा लगता है  i इसकी आवश्यकता न थी कथानक में कसाव पर विशेष ध्यान अपेक्षित है i

Comment by somesh kumar on October 29, 2014 at 6:35pm

AABHAR 

Comment by Dr.sandhya tiwari on October 29, 2014 at 2:33pm
यथार्थ आ0बधाई स्वीकार करें।

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