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बेड़ा गर्क कराती क्यों हो

ठूस ठूस कर खाती क्यों हो।
मोटी हो शर्माती क्यों हो।।

एक मासूम सी पत्नी हूँ।
यूँ चुटकुला सुनाती क्यों हो।।

बच्चे डर जाते है हरदम।
इतना गन्दा गाती क्यों हो।।

मुखड़े पर लीपा पोती कर।
मुझको रोज डराती क्यों हो।

आती नहीं बोलनी इंग्लिश।
बेड़ा गर्क कराती क्यों हो।।

खुद खाने के फाकें फिर भी।
भाई को बुलवाती क्यों हो।।
**********************
-राम शिरोमणि पाठक
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by ram shiromani pathak on December 5, 2014 at 10:27am
Adarneey shardindu Ji aap se sahamat Hun ///sadar

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on December 3, 2014 at 8:53pm
आपका उद्देश्य यदि हल्की - बेहद हल्की- हँसी मात्र हो तो कुछ कहना नहीं है मुझे....लेकिन भाई राम शिरोमणि जी यह साहित्यिक मंच है और पिछले कुछ समय में आपने हम सबको आश्वस्त किया है कि आप गम्भीर साहित्य की रचना करने में सक्षम हैं...उसी दिशा में आपको निरंतर अग्रसर होते देखने की इच्छा है. शुभकामनाएँ.
Comment by ram shiromani pathak on November 27, 2014 at 9:05pm
भाई सोमेश जी अभी नहीं।।ढूंढ़ रहा हूँ।।हा हा हा
बहुत आभार
Comment by somesh kumar on November 27, 2014 at 8:44pm

भाई शादी हो गई की नही !हम जैसे शादी-शुदा लोगों के मन की बात कहने वाला कोई  - - - -

Comment by ram shiromani pathak on November 27, 2014 at 2:49pm
बहुत बहुत आभार आदरणीय योगराज जी।।सादर

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 27, 2014 at 12:06pm

बढ़िया हास्य ग़ज़ल भाई राम शिरोमणि जी. हार्दिक बधाई स्वीकारें।

कृपया ध्यान दे...

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