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अक्सर सोच कर
समझ कर
चुप रह जाता हूँ ,
जब गहराई में
जाता हूँ ,
तो बस
इतना ही पाता हूँ ,
अक्सर सोच कर ,
समझ कर
चुप रह जाता हूँ ,
नेता बना हैं ,
देश को लुटने के लिए ,
मगर नेता जी की
बात सोचता हूँ ,
बहुत कुछ पाता हूँ
अक्सर सोच कर ,
समझ कर
चुप रह जाता हूँ ,
बेटा बना हैं ,
माँ बाप को चूसने के लिए ,
मगर सरवन कुमार को ,
सोचता हूँ तो ,
बहुत कुछ पाता हूँ
अक्सर सोच कर ,
समझ कर
चुप रह जाता हूँ ,
मंत्री बनते हैं ,
दौलत बनाने के लिए ,
मगर लाल बहादुर शास्त्री की
सोचता हूँ ,
तब बहुत कुछ पाता हूँ
अक्सर सोच कर ,
समझ कर
चुप रह जाता हूँ ,

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Comment

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Comment by Rash Bihari Ravi on March 12, 2011 at 2:56pm
dhanyabad ganesh ji awam vandana ji

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 12, 2011 at 9:28am
बहुत बढ़िया गुरु जी , आप अच्छा सोचते है , इस सोच हेतु धन्यवाद |

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