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गजल-ये नहीं शायरी के पन्नें है!

2122 1222 22

ये मेरी जिन्दगी के पन्ने हैं!
ये नहीं शायरी के पन्ने हैं!!

ये नशेमन है मेरी आहों के!
ये तेरी बेरुखी के पन्ने हैं!!

मुफलिसी बेबसी की ये चींखे!
तीरगी इस गली के पन्नें हैं!!
ंंंंंं
ये तो बच्चों की लाशे है या रब!
ये तेरी खामुशी के पन्ने हैं!!

ना समझ हो अभी क्या समझोगे!
मेरे कागज सभी के पन्ने हैं!!

देखनी हो जिसे दुनिया 'राहुल'!
मुझको पढ़ ले इसी के पन्ने हैं!!

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Rahul Dangi Panchal on December 22, 2014 at 4:38pm
आदरणीय गिरीराज जी इतना खूबसूरत तरीके से समझाने हेतु ह्रदयतल से धन्यवाद कुबूल करें! सादर!

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 22, 2014 at 4:34pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी सर बात बहुत अच्छे से समझाई है बहुत काम की बात... अं आँ के काफिया निर्धारण में सावधानी वाकई अनिवार्य है 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 22, 2014 at 4:23pm

आदरनीय राहुल भाई ,  सरज़मीं  दर असल  सर ज़मीन का छोटा कर बनाया शब्द है , उर्दू मे  हटा कर ऊपर बिन्दी लगाने की कई जगह छूट है , जैसे मकान को मकां आदि , सरजमीं मे काफिया  ई  नही,  ईं  है , बाकी काफिया आपने लिया है । शायद बात समझा सका होऊँ ।

Comment by Rahul Dangi Panchal on December 22, 2014 at 4:16pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी क्रपया मुझे सरजमीं काफिया न होने कारण समझाने की भी कष्ट करें तो बडी मेहरबानी होगी
Comment by Rahul Dangi Panchal on December 22, 2014 at 4:14pm
आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी बहुत बहुत धन्यवाद!
Comment by Rahul Dangi Panchal on December 22, 2014 at 4:13pm
आदरणीय गिरीराज जी मैं अवश्य कोशिश करुंगा सादर धन्यवाद स्वीकार करें
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 22, 2014 at 4:04pm

ये नशेमन है मेरी आहों के!
ये तेरी बेरुखी के पन्ने हैं!!------------- vaah vaah -----kya baat hai !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 22, 2014 at 3:04pm

आदरणीय राहुल भाई , अच्छी गज़ल हुई है , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें ।

बाक़ी बातें आदरणीय सौरभ भाई के कह दी है , एक बात और --

शायरी , बेरुखी , खामुशी के साथ - सरज़मीं , काफिया नही लिया जा सकता , इसे सुधार लीजियेगा ।

Comment by Rahul Dangi Panchal on December 22, 2014 at 12:39pm
सादर धन्यवाद नरेन्द्र जी
Comment by Rahul Dangi Panchal on December 21, 2014 at 9:00pm
आदरणीय डॉ विजय जी बहुत बहुत धन्यवाद!

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