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विभु से मांगो मित्र तुम, अब ऐसा वरदान

नये  वर्ष में शांत हो, मानव का शैतान

 

हो न धरा अब लाल फिर, महके मनस प्रसून

किसी अबोध अजान का, नाहक बहे न खून

 

सबके जीवन में खुशी, छा जाए भरपूर

अच्छे  दिन ज्यादा नहीं, भारत से अब दूर

 

कवि गाओ वह गीत अब, जिससे सदा विकास

तन में हो उत्साह प्रिय, मन में हो उल्लास

 

आपस में सद्भाव हो, सभी बने मन-मीत

ओज भरे स्वर में कवे, महकाओ कुछ गीत 

 

ऐसा जिससे नग हिले, विचले पारावार 

भरे देश हुंकार जब, बरसे धाराधार

 

पावन हो सबका ह्रदय, सुरभित हो संसार   

स्वाति बूँद से हो प्रकट, गजमुक्ता, घनसार

 

स्वागत है नव्-वर्ष का, जिसमे नव उत्कर्ष

विकसित सबका हिय-कमल  जगमग भारतवर्ष

 

भारत में ही भारती,  सबको बांटे ज्ञान

नए वर्ष में हो नया, उनका भी अभियान

 मौलिक/अप्रकाशित

 

                

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Comment by vijay nikore on December 23, 2014 at 3:47pm

नव-वर्ष का आगमन... पावन  ह्रुदय...  सुरभित हो संसार ... इसी को कार्यान्वित करते आओ हम सभी नव-वर्ष का स्वागत करें।

सुन्दर दोहों के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 23, 2014 at 3:40pm

आ० सरना जी

आपका  समर्थन हमेशा नव प्रेरणा देता  है i सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 23, 2014 at 3:39pm

लडीवाला जी

आभारी हूँ मित्र i धन्यवाद i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 23, 2014 at 3:38pm

खुर्शीद जी

आपका अनुमोदन मेरे लिये  बहुत मानीखेज है i सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 23, 2014 at 3:37pm

अनुज गिरिराज जी

आपक स्नेह तहे दिल से स्वीकार i आमीन i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 23, 2014 at 3:36pm

आ०शिज्जु भाई

आपके स्नेह का तलबगार हूँ i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 23, 2014 at 3:35pm

आ० सौरभ जी

इस ज्ञानवर्धक चर्चा  के लिए आपका सादर आभार i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 23, 2014 at 3:31pm

प्रिय सोमेश

आभार प्रकट करता हूँ i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 23, 2014 at 3:30pm

आ० सौरभ जी

आपक प्यार मिला i बेह्तर लगा i कवे को' कवे !' होना चाहिए कवि  के लिये संबोधन है i सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 23, 2014 at 3:27pm

योगेंद्रजी

आभार i सस्नेह i

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