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नवगीत : साल गुजरे जा रहे हैं.

**साल गुजरे जा रहे हैं.

आ रहे पल, जा रहे पल

साल गुजरे जा रहे हैं.

 

वक़्त बन के पाहुना,

आ गया है द्वार पर.

साज सज्जा वाद्य धुन.

गूंज मंगलचार घर.

नवल वधु से कुछ लजा,

दिन सुनहरे आ रहे हैं.

साल गुजरे जा रहे हैं.

 

बोझ बढ़ता नित नया.

स्कूल का बस्ता हुआ,

दाम बढ़ते माल के,

आदमी सस्ता हुआ.

नाम सुरसा का सुना जब,

आमजन भय खा रहे है.

साल गुजरे जा रहे हैं.

 

सूर्य भटका घूमता,

वक़्त के दुष्चक्र में.

नापता है दूरियां,

चाँद भी किस फ़िक्र में.

पल्लवित, पीले हुए कुछ.

वस्त्र बदले जा रहे हैं.
साल गुजरे जा रहे हैं.

**हरिवल्लभ शर्मा 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by harivallabh sharma on January 2, 2015 at 7:09pm

आदरणीय somesh kumar जी आपकी उत्साहित करती प्रतिक्रिया का ह्रदय से आभार.

Comment by harivallabh sharma on January 2, 2015 at 7:07pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी आपका कुशल मार्गदर्शन हमें उत्तरोत्तर प्रगतिपथ पर बढाता है..आपकी प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार. सादर.

Comment by harivallabh sharma on January 2, 2015 at 7:05pm

आदरणीय Hari Prakash Dubey जी आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया का ह्रदयतल से आभार.. 

Comment by harivallabh sharma on January 2, 2015 at 7:03pm

आदरणीय khursheed khairadi साहब आपका अनमोल स्नेह रचना को मिला..हार्दिक स्वागत एवं आभार आपका.

Comment by harivallabh sharma on January 2, 2015 at 7:02pm

आदरणीय Dr. Ashutosh Mishra जी आपकी स्नेहिल टीप का स्वागत..उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार..

Comment by harivallabh sharma on January 2, 2015 at 7:00pm

आदरणीय डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी आपका स्नेह मार्गदर्शन मिला आपका हार्दिक आभार सादर 

Comment by harivallabh sharma on January 2, 2015 at 6:57pm

आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडिवाला जी आपकी प्रेरक टीप का स्वागत..उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार सादर.

Comment by harivallabh sharma on January 2, 2015 at 6:52pm

आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया से रचना धर्मिता को पुष्टि मिली है ..आपका हार्दिक आभार.

Comment by somesh kumar on January 2, 2015 at 12:04am

आ गए नववर्ष में उत्कर्ष कुछ करते हुए 

एक दुसरे के सान्निध्य में लिखते-पढ़ते हुए 

ज़िन्दगी गुज़र जाएगी युहीं सफ़र करते हुए 

नवगीत मोहक हो गए आपसे  रंग भरते हुए |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 1, 2015 at 9:24pm

आदरणीय हरि वल्लभ भाई , शानदार नवगीत पढ़वाने लिये आपका शुक्रिया और गीत जके लिये हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

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