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//फितूर वाले शे'र में आदरणीय क्या आपका दिया मिसरा शे'र के पहले मिसरे से मेल खा रहा है?//
यह प्रश्न मुझसे क्यों ? यह सोचना आपका काम है आदरणीय, ग़ज़ल आपकी है, मैंने सुझाव मात्र दिया था, आप उसे न मानने के लिए स्वतंत्र हैं. मुझे उचित लगा होगा तभी न सुझाव दिया है.
//मैं तो कमबुद्धि हुँ //
आदरणीय, इस पक्ति की आवश्यकता नहीं है, हम सभी साथ साथ हैं.
सीमा पार फेकने का अर्थ यह निकल रहा है कि देश द्रोही सीमा पार के हैं, खैर यह मेरी अपनी सोच है, मैं अपनी सोच वापस लेता हूँ.
//मुझे आप अपने शिष्य मानकर मेरी इन बातो के जवाब समझाए//
आदरणीय इस मंच पर गुरु - शिष्य परम्परा नहीं है, हम सभी समवेत सीखते - सिखाते हैं. बस दिल खुला रखते हैं, सादर.
तुम दिमाग में से उस फितूर को उतार दों!!
//तुम दिमाग से जरा फितूर को उतार दों!! // अगर ऐसे कहे तो ....
इस शेर का कहन देखे जरा ....
//राष्ट्र की अखण्डता पे आँच लाने वालो को!
लात मार मार के कि फेंक सीमा पार दों!!//
देश द्रोहियों को सीमा पार क्यों फेकोगे भाई, उधर कोई गार्बेज एरिया है :-)
मिसरा सानी को कुछ अलग तरह से कहने का प्रयास करें.
अच्छी प्रस्तुति हुई है, बधाई स्वीकार करें.
आर्यवर्त की रिदा को दूध सा निखार दों!!
सुंदर ,देश-प्रेम और ओज से परिपूर्ण गज़ल पर बधाई |
आदरणीय राहुलभाई जी सुन्दर प्रस्तुति ... हार्दिक बधाई
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