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पीछे मेरी दुआ है |

वो आज है नही मेरी दुनिया में 

फिर भी बसती है मेरे जिया में 

लगता है आज भी याद करती है 

मुझे पाने की फ़रियाद करती है

शायद  खुश है ,जिन्दा है

क्यूंकि उसे कुछ हुआ है

वो आज जो है, जैसी है ,पीछे मेरी दुआ है |

मन करता है फिर से पाऊं उसे

दर्द भरी दुनिया से चुराऊं उसे

वो चली गयी पर कुछ कशिश तो है

चिराग न सही ,पर माचिस तो है

एहसास हो रहा है , उसने ख़त छुआ है

 वो आज जो है, जैसी है ,पीछे मेरी दुआ है |

वो लड़ना -झगड़ना बेमतलब की बातों का 

अलग आनंद था आता तब उन रातों का 

वो तेरा रूठना ,मेरा मनाना

वो छोटे से छोटे राज भी तुमको बताना  

हँसना ,हँसाना और तेरा मुस्कुराना

पर अब हुआ मालूम प्यार एक जुआ है 

 वो आज जो है, जैसी है ,पीछे मेरी दुआ है ||

*******************************************

"मौलिक व अप्रकाशित "

Views: 767

Comment

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Comment by somesh kumar on February 20, 2015 at 8:07pm

वो आज है नही मेरी दुनिया में -दुनियाँ 

फिर भी बसती है मेरी जिया में -मेरे जिया 

लगता है शायद याद करती है-शायद की जगह आज भी  

मुझे पाने की वो फ़रियाद करती है-वो के बिना काम चल सकता है 

शायद  खुश है ,जिन्दा है

क्यूंकि उसे कुछ हुआ है

वो आज जो है, जैसी है ,पीछे मेरी दुआ है |

मन करता है फिर से पाऊं उसे-पाऊँ

दर्द भरी दुनिया से चुराऊं उसे-चुराऊँ

वो चली गयी पर कुछ कशिश तो है

चिराग न सही ,पर माचिस तो है

एहसास हो रहा है , उसने ख़त छुआ है

 वो आज जो है, जैसी है ,पीछे मेरी दुआ है |

वो लड़ना -झगड़ना बेमतलब की बातों का 

अलग आनंद था आता तब उन रातों का 

वो तेरा रूठना ,मेरा मनाना

वो छोटे से छोटे राज भी तुमको बताना  

हसना ,हसाना और तेरा मुस्कुराना-हँसना /हँसाना

पर अब हुआ मालूम प्यार एक जुआ है 

 वो आज जो है, जैसी है ,पीछे मेरी दुआ है ||

कुछ सुधार अपेक्षित लगे अगर पसंद आए तो अपना सकते हैं |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 20, 2015 at 8:06pm

आदरणीय महर्षि भाई जी प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई 

Comment by maharshi tripathi on February 20, 2015 at 6:16pm

आपको रचना पसंद आयी लिखना सार्थक हुआ आ.वीरेंदर वीर जी |

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on February 20, 2015 at 6:07pm

खुबसूरत रचना आदरनीय  महर्षि  भाई | अच्छी लगी.

Comment by maharshi tripathi on February 20, 2015 at 5:00pm

आपका  हार्दिक आभार आ. गोपाल नारायण जी

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 20, 2015 at 1:46pm

aa0 maharshi jee

sundar rachna.

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