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रेलवे पुलिस (लघुकथा )

"साहब इस डिब्बे में एक आदमी अचेत पड़ा है,शायद जहरखुरानी  का शिकार है " रेलवे पुलिस का कर्मचारी बोला |

"देख अपने लिए भी कुछ छोड़ा है या सब ले गए ?- अफसर 

"सब ले गए साहब "- कर्मचारी 

"कहता हूँ ,सालों से किसी की चीज मत खाया करो ,छोड़ ये सब चल एक कप  चाय पिला "- अफसर कहते हुए बाहर निकल आते हैं |

"मौलिक व् अप्रकाशित "

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on February 3, 2015 at 4:30pm
अच्छी लघुकथा है आदरणीय. शुभकामनाएँ.

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 21, 2015 at 10:41am

आदरणीय , लघुकथा का अच्छा प्रयास हुआ है । आ. योगराज भाई की बात से सहमत हूँ , ज़हरखोर  का अर्थ , ज़हर खाने वाला , मे रे खयाल से ज़हरखुरानियों कहना चाहिये था , क्योंकि ज़हर खुरानी का अर्थ ज़हर खिलाने की घटना होता है ।

Comment by vandana on January 21, 2015 at 6:14am

 बढ़िया प्रयास आदरणीय 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 20, 2015 at 8:56pm

बहुत बढ़िया लघु कथा एक और भ्रष्टाचार की परते खोलती हुई ,बहुत बहुत बधाई महर्षि त्रिपाठी जी. 

Comment by somesh kumar on January 20, 2015 at 8:08pm

तन्त्र -तन्त्र में भ्रस्टाचार |सुंदर अभिव्यक्ति 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 20, 2015 at 7:17pm

आदरणीय योगराज सर ने सही कहा , दरअसल "जहरखुरानी" सही शब्द है ..और ये पूरा गिरोह है ! सादर  


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on January 20, 2015 at 7:05pm

आपकी लघुकथा के सन्दर्भ में ज़हरखोर शब्द सही नहीं है भाई महर्षि त्रिपाठी जी। ज़हरखोर का अर्थ होता है ज़हर खाने वाले।

Comment by kanta roy on January 20, 2015 at 7:02pm
आ.महर्षि जी , आपने आज की संवेदन विहीन पुलिस तंत्र का बहुत खूब चित्रण किया है । आभार
Comment by maharshi tripathi on January 20, 2015 at 4:42pm

आ. बागी जी ,,मुझे लगा कि शीर्षक सही पर आपकी बात सही है ,,,,मार्गदर्शन हेतु शुक्रिया |

आगे से ध्यान रखूँगा | बधाई हेतु शुक्रिया |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 20, 2015 at 3:45pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी, आपने बिलकुल सही सुझाव दिया है, मुझे भी जो जो बातें खटक रहीं थी वो सब आपने दूर कर दिया, एक बात और मैं कहना चाहूँगा .....शीर्षक सही नहीं है इसे "शिकार अपना अपना" या केवल "शिकार" करना सही होगा.

इस लघुकथा हेतु बहुत बहुत बधाई प्रिय महर्षि जी.

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