For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मोहब्बत इस ज़माने में गुनाह हो गया

हम तुम्हारे थे पर तुम क्यूँ समझी नही
बेवजह सबकी बातों में उलझी रही
संदेहात्मक परिस्थिति भी सुलझी नही
तुम से जुड़ना ही मेरा गुनाह हो गया
मोहब्बत इस ज़माने में गुनाह हो गया |

तुम से मिलकर फ़कीर दिल भी राजा हुआ
मन का मुरझाया फूल भी ताजा हुआ
मेरे हर दुःख-दर्द का भी जनाजा हुआ
तुम्हारा पास आना भी गुनाह हो गया
मोहब्बत इस ज़माने में गुनाह हो गया |

तुमने दिए जो जख्म अब वो भरते नही
मेरी सांसे भी रुकने से अब तो डरते नही
मर चुके जो इश्क़ में अब वो मरते नही
तेरे इश्क़ में मरना गुनाह हो गया
मोहब्बत इस ज़माने में गुनाह हो गया |

हम बेगाने हुए कोई और आया
हमारे सिवा कोई और भाया
मेरे सपनों  को कोई और लाया
हमसफ़र पे भरोसा गुनाह हो गया
मोहब्बत इस ज़माने में गुनाह हो गया ||

***************************************

"मौलिक व अप्रकाशित "

Views: 518

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by prashant tripathi on January 8, 2015 at 1:59am
bhut khub maharshi ji.....

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 7, 2015 at 7:59pm

अच्छी रचना लगी भाई जी , बधाई ।

Comment by Hari Prakash Dubey on January 6, 2015 at 5:14pm

सुन्दर प्रस्तुति  के लिए हार्दिक बधाई महर्षि त्रिपाठी जी !

Comment by maharshi tripathi on January 6, 2015 at 5:03pm

मेरी इस रचना पे आप सब के उत्साह के लिए ,हार्दिक धन्यवाद् |

आ.गोपाल जी ,अनुराग जी ,सोमेश जी और मिथिलेश जी |

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 6, 2015 at 3:35pm

mohabbat to bhayee har jamane me gunaah hee raha  chaloo  aapko apna jamana yad hai I achchhee kavita hai I

Comment by somesh kumar on January 6, 2015 at 10:36am

sunder prstuti 

Comment by Anurag Prateek on January 5, 2015 at 9:22pm

सुन्दर प्रस्तुति  के लिए हार्दिक बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 5, 2015 at 8:16pm

बढ़िया और सुन्दर प्रस्तुति  के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें....

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Feb 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service