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पीछे मेरी दुआ है |

वो आज है नही मेरी दुनिया में 

फिर भी बसती है मेरे जिया में 

लगता है आज भी याद करती है 

मुझे पाने की फ़रियाद करती है

शायद  खुश है ,जिन्दा है

क्यूंकि उसे कुछ हुआ है

वो आज जो है, जैसी है ,पीछे मेरी दुआ है |

मन करता है फिर से पाऊं उसे

दर्द भरी दुनिया से चुराऊं उसे

वो चली गयी पर कुछ कशिश तो है

चिराग न सही ,पर माचिस तो है

एहसास हो रहा है , उसने ख़त छुआ है

 वो आज जो है, जैसी है ,पीछे मेरी दुआ है |

वो लड़ना -झगड़ना बेमतलब की बातों का 

अलग आनंद था आता तब उन रातों का 

वो तेरा रूठना ,मेरा मनाना

वो छोटे से छोटे राज भी तुमको बताना  

हँसना ,हँसाना और तेरा मुस्कुराना

पर अब हुआ मालूम प्यार एक जुआ है 

 वो आज जो है, जैसी है ,पीछे मेरी दुआ है ||

*******************************************

"मौलिक व अप्रकाशित "

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Comment by maharshi tripathi on February 23, 2015 at 4:45pm

आ. खुर्शीद जी रचना पर सकारात्मक प्रतिक्रिया हेतु आपका आभार |

Comment by maharshi tripathi on February 23, 2015 at 4:44pm

आ. हरी प्रकाश जी ,,,मैंने सोमेश भाई की बात पर गौर किया है ,,,कुछ संसोधन भी किये ,,,मेरे ख्याल से शब्दों को ऐसे लिखा जा सकता है ,,बाकि आप सभी का मार्गदर्शन ही सब कुछ है | 

Comment by khursheed khairadi on February 23, 2015 at 9:51am

वो आज है नही मेरी दुनिया में 

फिर भी बसती है मेरे जिया में 

लगता है आज भी याद करती है 

मुझे पाने की फ़रियाद करती है

शायद  खुश है ,जिन्दा है

क्यूंकि उसे कुछ हुआ है

वो आज जो है, जैसी है ,पीछे मेरी दुआ है |

आदरणीय महर्षि त्रिपाठी जी ,भावपूर्ण रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें |सादर |

Comment by Hari Prakash Dubey on February 23, 2015 at 2:34am

आदरणीय महिर्षि त्रिपाठी जी, ...चिराग न सही ,पर माचिस तो है

एहसास हो रहा है , उसने ख़त छुआ है....वाह , सुन्दर रचना , बधाई ! बाकी सोमेश भाई की बात पर गौर करियेगा !

Comment by maharshi tripathi on February 23, 2015 at 12:11am

आ. उषा चौधरी जी रचना पर प्यार देने हेतु आपका आभार सादर !!!! 

Comment by maharshi tripathi on February 23, 2015 at 12:10am

आ. विजयशंकर जी रचना पर बधाई हेतु  ,,,,,आपका आभार सादर !!!

Comment by Dr. Vijai Shanker on February 22, 2015 at 10:50pm
आदरणीय महिर्षि त्रिपाठी जी, बहुत बहुत बधाई आपको आपकी इस सुन्दर मनोहर स्मृतियों से भरी प्रस्तुति पर, सादर।
Comment by Usha Choudhary Sawhney on February 22, 2015 at 9:28pm

पर अब हुआ मालूम प्यार एक जुआ है 

वो आज जो है, जैसी है ,पीछे मेरी दुआ है 

आदरणीय महर्षि त्रिपाठी जी, सुन्दर रचना।  

Comment by maharshi tripathi on February 20, 2015 at 9:30pm

आ. मिथिलेश जी आपका धन्यवाद् |

Comment by maharshi tripathi on February 20, 2015 at 9:30pm

आ. सोमेश जी ,,आपकी सलाह हेतु शुक्रिया ,,,,,मुझे लगता है दुनिया भी लिखा जा सकता है ,,,और मेरे शायद आपने ठीक कहा इसे सुधार सकते हैं | आपका सादर धन्यवाद् |

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