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दुनिया हँसेगी 
ये कैसा भय है
मात्र इस भय से
तुम उस रिश्ते पर
पूर्ण विराम लगाना चाहते हो
जिसका जन्म हुआ है
पावन भावनाओं के गर्भ से
क्या हँसी बाँटना पाप है 
नहीं ! 
तो फिर दुनिया के हँसने से
क्या परहेज है तुम्हें
हँसने से 
ईश्वर प्रसन्न होता है
आत्मा प्रसन्न होती है
अगर तुम्हारे और मेरे मिलन से
दुनिया हँसती है 
तो इससे भली बात क्या होगी 
तुम्हारे और मेरे लिये
आओ हम मिल जाते हैं 
हमेशा के लिये
और दुनिया को हँसा देते हैं
हमेशा के लिये 

उमेश कटारा
मौलिक व अप्रकाशित

Views: 591

Comment

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Comment by umesh katara on March 12, 2015 at 7:23am

आदरणीय VIRENDER VEER MEHTA जी आभार

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on March 10, 2015 at 2:17pm

आदरणीय उमेश कटारा जी रचना बहुत सुन्दर  लगी .....विशेष कर 

हँसने से 
ईश्वर प्रसन्न होता है
आत्मा प्रसन्न होती है
अगर तुम्हारे और मेरे मिलन से
दुनिया हँसती है 
तो इससे भली बात क्या होगी 

.........बधाई स्वीकार  करे !

Comment by umesh katara on March 9, 2015 at 11:57pm

आदरणीयडॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी शुक्रिया

Comment by umesh katara on March 9, 2015 at 11:56pm

आदरणीय Shyam Mathpal जी शुक्रिया

Comment by umesh katara on March 9, 2015 at 11:56pm

आदरणीय  Shyam Mathpalजी शुक्रिया

Comment by umesh katara on March 9, 2015 at 11:55pm

आदरणीय  maharshi tripathiजी शुक्रिया

Comment by umesh katara on March 9, 2015 at 11:55pm

आदरणीय  Hari Prakash Dubeyजी शुक्रिया

Comment by umesh katara on March 9, 2015 at 11:54pm

आदरणीय  Neeraj Kumar 'Neer'जी शुक्रिया

Comment by Neeraj Neer on March 9, 2015 at 10:23pm

बहुत बढ़िया,  अच्छे भाव .... 

Comment by Hari Prakash Dubey on March 9, 2015 at 10:03pm

आदरणीय उमेश कटारा जी सुन्दर भावों से परिपूर्ण रचना है ,हार्दिक बधाई आपको !सादर 

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