For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

चलते चलते ……

1.

एक कतरा
देर तक
बहते बहते
कपोल पर ही सो गया
शायद
अभी इंतज़ार बाकी था

2.

ये अलस्सुब्ह
किसकी नमी को छूकर
बादे सबा आई है
खुली पलक का
कोई ख़्वाब
सिसकता रह गया शायद

3.

तेरे हर वादे पे
यकीं करता रहा
पर तुझे यकीं न आया
मैं हर लम्हा तुझपे
सौ सौ बार मरता रहा
मेरी मौत को भी तूने
मेरी नींद समझा
नज़र भर के भी तूने
न देखा मुझको
गो चहरे से कफ़न
बार बार हटता रहा

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 682

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on March 26, 2015 at 12:02pm

आदरणीय   Hari Prakash Dubey जी रचना पर आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on March 26, 2015 at 12:01pm

आदरणीय    Dr Ashutosh Mishra जी रचना पर आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Hari Prakash Dubey on March 26, 2015 at 9:17am

आदरणीय सुशील सरना जी , रचना पर आपको हार्दिक बधाई ! सादर

एक कतरा

देर तक

बहते बहते

कपोल पर ही सो गया

शायद

अभी इंतज़ार बाकी था......वाह 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 25, 2015 at 3:54pm

आदरणीय सुशील जी ..इस शानदार रचना के लिए हार्दिक बधाई saadar

नज़र भर के भी तूने 
न देखा मुझको 
गो चहरे से कफ़न 
बार बार हटता रहा..बहुत बढ़िया 

Comment by Sushil Sarna on March 24, 2015 at 9:16pm

आदरणीय   Shyam Mathpal जी रचना पर आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on March 24, 2015 at 7:25pm

आदरणीय सबीर कबीर साहिब रचना को आपने सराहा ,आपका हार्दिक आभार।  आपके द्वारा इंगित त्रुटि पर मेरे ध्यानाकर्षण के लिए तहे दिल से शुक्रिया ,मैं शीघ्र ही इसे संशोधित कर लूँगा। पुनः आपका हार्दिक हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on March 24, 2015 at 7:21pm

आदरणीय   Shyam Mathpal     जी रचना पर आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on March 24, 2015 at 7:21pm

आदरणीय    savitamishra    जी रचना पर आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on March 24, 2015 at 7:20pm

आदरणीय    vijay nikore    जी रचना पर आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on March 24, 2015 at 7:20pm

आदरणीय   Shyam Narain Verma   जी रचना पर आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
9 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
23 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service