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हीरा हूँ ........'इंतज़ार'

हर हीरा किसी हसीना के
गले का हार नहीं बनता !
हर हसीना के गले को
हीरों का हार नहीं मिलता !

कई हीरे ज़मी में दबे रहते हैं
कोयलों की गोद में
सोये पड़े रहते हैं !
उनको तराशने वालों का
औजार नहीं मिलता !

न कमी हसीना के हुस्न में है
न हीरों की गुणवत्ता में !
बस किस्मत के खेल हैं सारे
किसी को वोह मिल जाते हैं
और हमें प्यार नहीं मिलता !!

***************************

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 781

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Comment by Hari Prakash Dubey on March 26, 2015 at 9:20am

आदरणीय मोहन सेठी जी, सुन्दर रचना, ह्रदय से बधाई ,सादर !

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 25, 2015 at 3:55pm

सुंदर रचना ...बिलकुल सहमत हूँ आपसे सादर 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on March 24, 2015 at 10:35pm

सुन्दर अभिव्यक्ति!

Comment by MUKESH SRIVASTAVA on March 24, 2015 at 10:48am
sahee kahaa sundarta se kaha mtira - badhaee
Comment by vijay nikore on March 24, 2015 at 10:47am

रचना अच्छी लगी। बधाई।

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 24, 2015 at 7:45am

आदरणीय  krishna mishra 'jaan'gorakhpuri जी धन्यवाद पसन्दगी के लिये ....बिलकुल सही कहा आपने... भाग्य भी कुछ होता है और वो सब ईश्वरीय शक्ति के अधीन है ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 24, 2015 at 7:42am

आदरणीय somesh kumar जी पसंदगी के लिये आभार ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 24, 2015 at 7:40am

आदरणीय  Dr. Vijai Shanker जी सही है आप की बात ....हसीना भी जोखिम बन सकती है ....इसलिए रूप पर नहीं रूह पे ध्यान केन्द्रित करना जरूरी है ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 24, 2015 at 7:34am

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी आभार ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 24, 2015 at 7:32am

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी आप के दार्शनिक उदाहरण से रचना को स्वीकृति मिलगई ..बहुत बहुत धन्यवाद ...सादर 

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