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सूने पन्ने पे तेरा नाम .......'इंतज़ार'

बहुत बार समझाया
कभी दिल को फुसलाया
मगर खुद ही ना समझ पाया
मैं हूँ क्यों यहाँ पर
बस रोज़ वो अँधेरे
और तेरी यादें के
दहकते अंगारे
परवानों सा जलने की
दुआ करता हूँ
कुछ हसीन सपनों का व्यापार
अपनी नींदों से
किया करता हूँ
दिल में बसी मूरत को
पलकों में छिपा रखता हूँ

तेरी यादों को
कागज पे अक्सर उतार देता हूँ
जब सूने पन्ने पे तेरा नाम आता है
क्या जानू क्यूँ पन्ने को
अहंकार हो जाता है
और मुझे फिर से प्यार हो जाता है !!

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 934

Comment

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Comment by Meena Pathak on March 26, 2015 at 8:43pm

बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...बधाई आ० मोहन जी 

Comment by Shyam Mathpal on March 26, 2015 at 8:03pm

आ. मोहन सेठी जी,

सुंदर रचना . हार्दिक बधाई.

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 26, 2015 at 12:43pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी आप के प्रोत्साहन से हिम्मत बनी रहती है ...आभार ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 26, 2015 at 12:41pm

आदरणीय Hari Prakash Dubey जी बहुत बहुत धन्यवाद ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 26, 2015 at 12:40pm

आदरणीय krishna mishra 'jaan'gorakhpuri जी शुक्रिया ...आप को रचना के भाव अच्छे लगे धन्यवाद ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 26, 2015 at 12:37pm

आदरणीय Sushil Sarna जी आभार ...आप की प्रशंसा से मेरा उत्साह बना रहता है ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 26, 2015 at 12:34pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी आप के प्रोत्साहन के लिये बहुत बहुत धन्यवाद ...सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 26, 2015 at 11:48am

बहुत सुन्दर भाव अभिव्यक्ति हुई है , आदरणीय मोहन भाई , बधाइयाँ ॥

Comment by Hari Prakash Dubey on March 26, 2015 at 10:12am

जब सूने पन्ने पे तेरा नाम आता है
क्या जानू क्यूँ पन्ने को
अहंकार हो जाता है 
और मुझे फिर से प्यार हो जाता है !!....बहुत बढ़िया ,हार्दिक बधाई आपको आदरणीय मोहन सेठी जी !

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 25, 2015 at 8:57pm

मैं हूँ क्यों यहाँ पर
बस रोज़ वो अँधेरे
और तेरी यादें के
दहकते अंगारे

क्या बात है! आदरणीय आपकी कविताओं का भाव मुझे हर बार सोचने पर मजबूर करता है!खूबसूरत कविता ढेरों बधाईयां!सादर!

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