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हाँ ये खबर जफ़ा की, बनाई हुई तो है - ग़ज़ल

221 2121 1221 212

लोगों के दरमियान उड़ाई हुई तो है

हाँ ये खबर जफ़ा की, बनाई हुई तो है

 

हों तेरे दिल में रश्क़ो हसद तो हुआ करे

आखिर ये आग तेरी लगाई हुई तो है

 

सच ही कहा ये आपने आज़ार देखकर

इक चोट मेरे दिल ने भी खाई हुई तो है

 

गलियों में ये पड़े हुए खाशाक* देखिये                *कूड़ा करकट

इस शह्र में कहीं पे सफाई हुई तो है

 

चटखी हैं उँगलियाँ वो भुजायें फड़क गईं

शामत किसी की “आप” में आई हुई तो है

 

काली घटा ठहर गई है आसमान पर

आखिर बरसती क्यों नहीं छाई हुई तो है

 

किरदार याद आ रहे हैं एक-एक कर

रूदाद ये किसी की सुनाई हुई तो है

 

खामोश हो गये मेरे आने से क्यों सभी

हाँ मुझसे कोई बात छुपाई हुई तो है

-मौलिक व अप्रकाशित

 

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Comment by शिज्जु "शकूर" on April 15, 2015 at 7:09am

आदरणीय जवाहर लाल जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 9, 2015 at 9:29pm

बेहतरीन न कहूं तो और क्या कहूं 

शामत किसी की “आप” में आई हुई तो है


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Comment by शिज्जु "शकूर" on April 9, 2015 at 11:00am

भाई कृष्ण मिश्रा जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया


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Comment by शिज्जु "शकूर" on April 9, 2015 at 11:00am

आदरणीय डॉ आशुतोष जी आपका तहेदिल से शुक्रिया


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Comment by शिज्जु "शकूर" on April 9, 2015 at 10:59am

जनाब समर कबीर साहेब आपका बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 8, 2015 at 10:30pm

गलियों में ये पड़े हुए खाशाक देखिये

इस शह्र में कहीं पे सफाई हुई तो है

क्या बात है आ०! सुन्दर गज़ल पर तहेदिल से बधाईयां!

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 8, 2015 at 6:19pm

आदरणीय शिज्जू जी ..हर शेर उम्दा ..कोई किसी से कम नहीं ..जितनी तारीफ़ की जाए कम है ..आपको इस श्रेष्ठ रचना का रचनाकार होने के लिए ढेर सारी बधाई सादर 

Comment by Samar kabeer on April 8, 2015 at 5:56pm
जनाब शिज्जु "शकूर" जी,आदाब,किसी भी बह्र में एक रुक्न की कमी बेशी से पढ़ने में जो रुकावट महसूस होती है उसे अरूज़ की इस्तिलाह में सक्ता कहते हैं |

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Comment by शिज्जु "शकूर" on April 8, 2015 at 4:59pm

आदरणीया निधि जी आपका हार्दिक आभार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on April 8, 2015 at 4:56pm

जनाब समर कबीर साहब सक्ता दोष के बारे में मेरी जानकारी सिफर है आपने जो इस्लाह बताई वो सर आँखों पर मैं सुधार लेता हूँ आपका तहेदिल से शुक्रिया जो आपने मेरी रचना को समय दिया

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