For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लघुकथा : साहस (गणेश जी बागी)

“मास्टर साहब तनिक मेरे छोटका बेटा को समझाइये न, गलत संगत में पड़ वह अपनी जिन्दगी और खानदान का नाम... दोनों बर्बाद कर रहा है.”  

मास्टर साहब को चुप देख प्रधान जी पुनः बोल पड़े.

“आप तो उसे ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाये हैं आप की बात वो जरुर मानेगा.”

“प्रधान जी आपके कहने से पहले ही मैंने सोचा था कि उसे समझाऊं किन्तु ...”

किन्तु क्या मास्टर साहब ?

"प्रधान जी क्षमा चाहूँगा किन्तु कीचड़ से सनी उसकी जूती तथा अपना उजला लिबास देख उसे समझाने का साहस मैं नहीं जुटा सका."

(मौलिक व अप्रकाशित)
पिछला पोस्ट =>अतुकांत कविता : मुक्ति

Views: 997

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by kanta roy on July 28, 2015 at 10:39am
वाह !!!!! कीचड़ में सनी जूती से उजले लिबास का बच कर निकलना ..... बहुत बडी़ बात कह गये आप आदरणीय गणेश बागी जी । बधाई
Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 4, 2015 at 4:42pm

आदरणीय बागी जी कथा लघु है मगर बहुत बड़ी बात की तरफ इशारा करती है आपकी यह रचना ..मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 20, 2015 at 5:02pm

लघुकथा पर उपस्थिति एवं सराहना हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीया सविता मिश्रा जी.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 20, 2015 at 5:00pm

आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, लघुकथा पर खुबसूरत काव्य पक्तियों के साथ उपस्थित होना सुखकर लगा, बहुत बहुत आभार.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 20, 2015 at 4:59pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी, लघुकथा पर आपका आशीर्वाद मिला, बहुत बहुत आभार.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 20, 2015 at 4:58pm

सराहना हेतु हृदय से आभार आदरणीय जितेन्द्र पस्तारिया जी.

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 17, 2015 at 11:02pm

सुन्दर लघुकथा! बधाई आदरणीय!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 17, 2015 at 3:17pm

प्रधानजी को अपने बेटे के भविष्य़ को सुधारने की चिंता तब हुई जब वह पूरी तरह से लहेंडा हो चुका था. ऐसे ’बूढ़े तोते’ क्या पोस मानते हैं ? मास्टरजी के उत्तर के माध्यम से आपने संयत बात साझा की है.

वैसे इस लघुकथा में ’आपकी वाली बात’ तनिक कम है.

हार्दिक शुभकामनाएँ भाई गणॆश बाग़ीजी..

मेरी पहली वाली टिप्पणी लगता है, ’उड़’ गयी !!.. ..

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 17, 2015 at 10:14am

काजल की कोठ्ररी हो या कीचड भरी राह,   हम तो ऐसे ही बच निकलेंगे.....सच्चे गुरु की वाह !  परमार्थ से भरपूर लघु कथा.  हार्दिक बधाई.   सादर

Comment by Dr. Vijai Shanker on April 17, 2015 at 9:45am
क्या समझायेंगे मास्टर साहब, जो परिवार और परिवेश समझा देता है। दुनियाँ भर के शिक्षाविद यही मानते हैं , बताते हैं , बस हम हैं जो इसे न जानते हैं , न मानते हैं।
बहुत सही, सशक्त , प्रभावशाली लघु- कथा , बहुत बहुत बधाई , आदरणीय इंजीo गणेश जी बागी जी, सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"अच्छा है। "
4 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय , ग़ज़ल के दूसरे शेर       'ग़म-ए-दौलत मिली है किस्मत से…"
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"विषय मुक्त होने के कारण लघु कथा लिखने का प्रयास किया है , अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त…"
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय भाईजी  फागुन आया ऐसा छाया, बाग़ आम का है बौराया भरी मंजरी ने तरुणाई, महक रही सारी…"
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी , सुझाव और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।  चौपाई विधान में 121…"
7 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय भाईजी  चौपाई की मुक्त कंठ से प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार । चौपाई विधान में…"
7 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"शब्द बाण…"
7 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक जी, रचना/छंदों पर अपनी राय रखने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।  //तोतपुरी ... टंकण…"
15 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"ग़ज़ल को इतना समय देने के लिए, शेर-दर-शेर और पंक्ति-दर-पंक्ति विस्तार देने के लिए और अमूल्य…"
15 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय,  आपका कोटिश: धन्यवाद कि आपने विस्तृत मार्ग दर्शन कर ग़ज़ल की बारीकियाँ को समझाया !"
15 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय नमस्कार, आपने  अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया दी बहुत शुक्रिया। ग़म-ए-दौलत से मेरा इशारा भी…"
17 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  आदरणीय अजय गुप्ता अजेय जी सादर, प्रथम दो चौपाइयों में आपने प्रदत्त चित्र का सुन्दर वर्णन…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service