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“ कुछ कीजिये..सर!! आप ने तो भाषण दे दिया कि प्राकृतिक आपदा के कारण, गुणबत्ता रहित अनाज भी समर्थन मूल्य पर खरीद लेंगे. इससे हम लोगों को नुक्सान हो जायगा.  चुनावी फंड, रिफंड करने का अच्छा अवसर है..”

“ अरे!! आप लोग व्यापारी हो, इतना भी नही समझते. किसानो को पैसों  की बहुत जरुरत है. अभी भाषण ही दिया है , लिखित आदेश की गति बहुत धीमी होती है.."

   जितेन्द्र पस्टारिया

(मौलिक व् अप्रकाशित)

Views: 866

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 20, 2015 at 8:59pm

आपका बहुत-बहुत आभार, आदरणीया प्रिया जी

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 20, 2015 at 8:49pm

आपकी बधाई सहर्ष सिर आँखों पर ,आदरणीय गिरिराज जी

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 20, 2015 at 8:48pm

लघुकथा पर आपकी सराहना हेतु आपका आभारी हूँ, आदरणीय लक्ष्मण जी

सादर!

Comment by Priya mishra on April 20, 2015 at 6:36pm
Bhot khub sundar laghu katha

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 20, 2015 at 3:10pm

बहुत सुन्दर ! आदरनीय जितेन्द्र भाई , हार्दिक बधाई  लघुकथा के लिये ॥

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 19, 2015 at 6:19pm

अवसर भुनाने के स्वार्थ पर जोरदार तंज कसती सुंदर  लघु कथा के लिए  हार्दिक  बधाई श्री जितेन्द्र पस्टारिया जी 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 19, 2015 at 10:53am

आपका ह्रदय से आभार, आदरणीय कृष्णा जी

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 19, 2015 at 10:52am

रचना को प्रोत्साहित करती सराहना हेतु आपका आभारी हूँ, आदरणीया राजेश दीदी.

सादर!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 19, 2015 at 10:26am

सुन्दर लघुकथा पर बधाई जीतेन्द्र सर!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 19, 2015 at 8:40am

अवसरवादिता का शनदार उदाहरण ....कथनी करनी में फर्क ..बहुत बढ़िया कटाक्ष करती लघु कथा .हार्दिक बधाई जितेन्द्र भैया .

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