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जवानी की दहलीज़ पार कर चुकी  विनीता ने फिर से लड़के वालों के आने की खबर सुनते ही अपने घर जाने के अरमानों को संजों लिया. अपनी माँ के खटिया पकड़ने के बाद, उसे अपने पिता समान बड़े भाई और माँ के दर्जे वाली भाभी से ही आशायें बंधी हुई है. आज फिर एक कुलीन परिवार का लड़का, अपनी सहमती जताकर लौट गया. मेहमानों के लौटते ही भाभी ने विनीता से कहा..

“बिन्नो!! मैं ऑफिस के लिए बहुत लेट हो गई हूँ. तुम बच्चों को तैयार कर स्कूल भिजवा देना, माँ जी का कमरा और कपडे देख लेना और सुनो.. मैं तुम्हारे लिए आज वाले लड़के से भी सुंदर राजकुमार ढूंढ कर लाउंगी...”

विनीता अपने काम में जुट गई और अपने अरमानो को फिर से दबाकर, एक नए जीवनसाथी की कल्पना उसके मन में सजने लगी...

जितेन्द्र पस्टारिया

(मौलिक व् अप्रकाशित)  

Views: 770

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 16, 2015 at 8:07pm

आपके स्नेह हेतु आपका आभारी हूँ,आदरणीय कृष्णा जी.

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 16, 2015 at 8:06pm

रचना पर आपकी स्नेहिल उपस्थिति से बड़ा मनोबल मिलता है आदरणीया राजेश दीदी

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 16, 2015 at 8:04pm

प्रोत्साहन हेतु आपका ह्रदय से आभार, आदरणीय हरिप्रकाश जी

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 16, 2015 at 8:03pm

यह सब ओ.बी.ओ. और गुरुजनों का सानिध्य है ,आदरणीय जवाहर जी. स्नेह हेतु आपका आभारी हूँ

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 16, 2015 at 8:01pm

आपका बहुत-बहुत आभार, आदरणीया वंदना जी

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 16, 2015 at 8:01pm

आपका ह्रदय से आभार, आदरणीय विनय जी

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 16, 2015 at 8:00pm

आपकी बधाई सहर्ष शिरोधार्य, आदरणीय सौरभ जी. अपना स्नेह व् मार्गदर्शन हमेशा बनाये रखियेगा

सादर!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 16, 2015 at 5:54pm

आपकी नज़र दिनोदिन प्रखर होती जा रही है, भाईजी. 

हृदय से बधाइयाँ ..

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 15, 2015 at 10:46pm

आदरणीय जितेन्द्र सरजी आपकी लघुकथाए अपने शबाब पर आती जा रही है!...बहुत बहुत बधाई!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 15, 2015 at 10:40pm

मर्मस्पर्शी रचना जो अपनों का अपनों के हो हाथों शोषण का कच्चा चिटठा खोलती है ...बहुत बढ़िया लघु कथा .बधाई आपको जितेन्द्र भैया 

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