For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आँखों में बेबस मोती है …

आँखों में बेबस मोती है …

रात बहुत लम्बी है

ज़िंदगी बहुत छोटी है
पत्थरों के बिछोने पे
लोरियों की रोटी है
अब वास्ता ही नहीं
हाथों की लकीरों से
भूख बिलखती है पेट में
मुफलिसी साथ सोती है
आते ही मौसम चुनाव का
होठों पे हँसी होती है
राजनीति की जीत हमेशा
हम जैसों से ही होती है
हर चुनाव के भाषण में
नाम हमारा ही होता है
कुर्सी मिलते ही फिर से
फुटपाथ पे तकदीर होती है
संग होते हैं श्वान वही
वही भूखी रात होती है
रूठी हुई ज़िंदगी का 
आँखों में बेबस मोती है

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 631

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on May 7, 2015 at 7:55pm

आदरणीय  Dr Ashutosh Mishra जी रचना  पर आपकी स्नेहिल ऊर्जावान प्रशंसा का तहे दिल से शुक्रिया। 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 6, 2015 at 2:49pm

आदरणीय सुशील जी ..वर्तमान परिदृश्य में जो कुछ हो रहा है उसका चित्रण आपने बखूबी किया है इस रचना  के माध्यम से ..जिसके लिए मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by Sushil Sarna on May 6, 2015 at 12:49pm

आदरणीय  krishna mishra 'jaan'gorakhpuri जी रचना  पर आपकी स्नेहिल ऊर्जावान प्रशंसा का तहे दिल से शुक्रिया। 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on May 5, 2015 at 9:06pm

आम आदमी का दर्द लिए बहुत ही लाजव़ाब कविता आपको दिल से बहुत बहुत बधाई आदरणीय shushil जी!

Comment by Sushil Sarna on May 5, 2015 at 1:08pm

आदरणीय जी  रचना पर  आपकी मधुर प्रशंसा एवं सुझाव का हार्दिक आभार। आपके सुझाव पर अमल करने का प्रयास करूंगा।  इस स्नेह हेतु आपका हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 5, 2015 at 1:04pm

आदरणीय मोहन सेठी  जी  रचना पर  आपकी प्रशंसात्मक स्वीकृति का हार्दिक आभार। 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 5, 2015 at 1:03pm

बहुत खूब आ. सरना साहब. 
आपकी रचना का बहुत बड़ा हिस्सा किसी न किसी बहर में है. थोडा और प्रयास कर के इसे नज़्म की सूरत में ढाला जा सकता है.
सादर  

Comment by Sushil Sarna on May 5, 2015 at 1:03pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर जी  रचना में निहित भावों को मिली आपकी प्रशंसात्मक स्वीकृति ने रचना का जो मान बढ़ाया है उसके लिए आपका हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 5, 2015 at 1:01pm

आदरणीय श्री सुनील  जी रचना में निहित भावों पर आपकी प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 5, 2015 at 1:00pm

आदरणीय समर कबीर जी रचना में निहित भावों पर आपकी प्रतिक्रिया ने लेखन को सफल किया।  आपका हार्दिक आभार। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
13 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service