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"बेमेल रिश्ता"
_______________________

सुशील के लेखन में निहित नकारात्मक सोच ने सुमन को आज फिर दुविधा में डाल दिया।
जब लेखन में इतना कठोर तो वास्तव जीवन में .....!!!!

उसने तय कर लिया मुझे भविष्य की रूदाली नहीं बनना ।

"तुम्हारा लेखन महिला विरोधी और मैं महिला सम्मान की पुजारी । हमारा मेल नामुमकिन है सुशील जी । "
एक म्यान में दो तलवार भला कैसे रह सकती है।



नीता कसार
जबलपुर

मौलिकअप्रकाशीत

Views: 674

Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 28, 2015 at 10:53am

आदरणीया नीताजी, भाई गणेशजी एवं भाई शुभ्रांशुजी ने इशारों में बहुत ही तथ्यपरक बातें की हैं. संज्ञान ले कर अभ्यासरत रहें.

शुभेच्छाएँ

Comment by Nita Kasar on May 28, 2015 at 10:23am
धन्यवाद गनेशजी, शुभ्रांशू जी
Comment by Shubhranshu Pandey on May 27, 2015 at 10:47am

आदरणिया नीता जी, 

लेखन में नकारात्मक सोच और कठोर ये दो अलग अलग भाव को इंगित करते हैं.

//एक म्यान में दो तलवार भला कैसे रह सकती है।//

तलवार जब भी चलेगी मार काट ही मचायेगी. अगर दोनो  को तलवार ही माना है तो फ़िर दोनो में कम कौन है??

 साहित्य के हिसाब से स्वभाव का आकलन हो तो फ़िर वीर रस पर केवल फ़ौजियों का अधिकार हो और श्रूंगार रस वालों को लम्पट का लेवल मिल जायेगा.हा हा हा

सुन्दर प्रयास.

सादर.

 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 26, 2015 at 3:49pm

कथा इसमें क्या है, ऐसा लगता है जैसे यह किसी कहानी का अंश हो जबकि लघुकथा स्वयं में एक पूर्ण कहानी होती है. इस प्रयास पर मैं उत्साहवर्धन करता हूँ सादर.

एक बात और ... शीर्षक 'लधुकथा'  को लघुकथा कर लें.

Comment by Nita Kasar on May 26, 2015 at 10:45am
धन्यवाद Vinay bhai ji
Comment by विनय कुमार on May 25, 2015 at 10:32pm

अच्छी लघुकथा आदरणीया नीता कसार जी..

कृपया ध्यान दे...

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