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अतीत

अस्पताल से खबर आई और वह बदहवास सा भागा  I 
" पापा ..." इसके आगे बेटी  कुछ न बोल पायी थी I वह जीवन -मृत्यु के बीच झूल रही थी  ! किसी दरिंदे ने उसके ऊपर तेज़ाब ......I 
" ओह !" उसका  हृदय चीत्कार कर उठा , साथ ही उसे याद आया अपना अतीत  i आज से तीस वर्ष पहले उसने भी तो यही किया था i  

मीना पाण्डेय
बिहार
मौलिक व् अप्रकाशित

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Comment

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Comment by meena pandey on May 30, 2015 at 12:18pm

आभार आदरणीय kewal  prasad  जी 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 28, 2015 at 8:21pm

आ0  मीना जी,  //आज से तीस वर्ष पहले उसने भी तो यही किया था i //   सुंदर लघु कथा के लिये बधाई स्वीकारें. सादर 

Comment by meena pandey on May 28, 2015 at 6:21pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आभार आपने मेरी कथा को सम्पादित कर और बेहतर बना दिया है बहुत बहुत धन्यवाद आपके स्नेहिल मार्गदर्शन के लिए 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 28, 2015 at 12:29pm

मीना जी

कथा अच्छी है  पर प्रस्तुति  और अच्छी हो सकती थी i  आपकी कथा मेरे सम्पादन  में कुछ ऐसी होती - 

अस्पताल से खबर आई और वह बदहवास सा भागा  I
" पापा ..." इसके आगे बेटी  कुछ न बोल पायी थी I वह जीवन -मृत्यु के बीच झूल रही थी  ! किसी दरिंदे ने उसके ऊपर तेज़ाब ......I
" ओह !" उसका  हृदय चीत्कार कर उठा , साथ ही उसे याद आया अपना अतीत  i आज से तीस वर्ष पहले उसने भी तो यही किया था i  

Comment by meena pandey on May 28, 2015 at 11:42am

आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on May 27, 2015 at 11:02pm

बढ़िया लघुकथा 

पश्चाताप की अग्नि जीवन भर साथ रहती है और जलाती भी है गहरे तक 

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