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आज फिर आँधियाँ उठीं दिल में
आज फिर नज़र , आप आये हैं !

खाक़ हो जाते ,ग़र नहीं मिलते
खत्म अब , गर्दिशों के साये हैं !

सोचते रहते जिनको शामो सहर,
ख्वाबों में भी , कब वो आये हैं !

खिल उठी है ये सारी कायनात,
मन ही मन जब वो मुस्कुराएं हैं!

शायद करेंगे ,आज वादे वफ़ा,
फिर से पहलू में आज आये हैं!

आज फिर आँधियाँ उठीं दिल में
आज फिर नज़र , आप आये हैं !!

मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by विनय कुमार on May 31, 2015 at 3:02am

बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री सुनील जी , मेरी पहली कोशिश की सराहना करने के लिए धन्यवाद ..

Comment by विनय कुमार on May 31, 2015 at 3:01am

बहुत बहुत आभार आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी ..

Comment by shree suneel on May 31, 2015 at 2:42am
आज फिर आँधियाँ उठीं दिल में
आज फिर नज़र , आप आये हैं !"
अच्छी प्रस्तुति आदरणीय विनय कुमार जी. हार्दिक बधाई आपको.
Comment by Shyam Narain Verma on May 30, 2015 at 4:03pm
सुन्दर भाव पूर्ण रचना के लिये आपको बधाइयाँ ।
Comment by विनय कुमार on May 30, 2015 at 11:12am

बहुत बहुत आभार आदरणीय समर कबीर जी । दरअसल ये मेरा पहला प्रयास है इस विधा में इस मंच पर , प्रोत्साहन हेतु बहुत बहुत धन्यवाद..

Comment by Samar kabeer on May 30, 2015 at 10:44am
जनाब विनय कुमार सिंह,जी,आदाब,सुन्दर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।

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