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 “वहीँ होगा तुम्हारा  लाड़ला इस वक़्त भी है न ? कितनी बार कहा दोस्ती बराबर वालों से ठीक है  सर्वेंट के उस लड़के से उसने क्या समझ के दोस्ती की? कुछ तो कॉमन हो... पर तुम क्यूँ समझाती, खुद भी तो.... छोटे घर की... छोटी सोच ...

जैसे संस्कार हैं वही तो बच्चे को दोगी” व्हीस्की का घूँट गले में उतारते हुए मोहित बोला|

“हाँ पापा है न एक चीज कॉमन !! उसके पापा भी रोज ड्रिक करके इतनी रात  गए घर में आते हैं और उसकी मम्मी पर इसी तरह चिल्लाते हैं, मेरी मम्मी की आँखें भी बरसती हैं और उसकी मम्मी की भी” बेटा अचानक अन्दर आते हुए बोला|

.

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by rajesh kumari on July 21, 2015 at 10:06am

आ० वीरेंदर वीर जी,आपको लघु कथा प्रभावित की मेरा लिखना सार्थक हो गया दिल से बहुत- बहुत आभार आपका.  

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on July 20, 2015 at 11:07pm
सुन्दर और सार्थक तरीके से अपना प्रभाव छोड़ती लाजवाब रचना। इस लघुकथा के लिये सादर बधाई आद: राजेश कुमारी जी।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 20, 2015 at 10:57pm

बहुत बहुत आभार प्रतिभा जी,लघु कथा के मर्म को सही पकड़ा आपने,जो पिता बच्चों की मम्मी को दुखी रखता हो उसके बच्चे उससे सिर्फ डर से सम्मान करेंगे या बात मानेंगे  दिल से नहीं दिल में तो नफरत पालेंगे  यही बच्चे  बड़े होकर बगावत पर उतर आयेंगे | 

Comment by pratibha pande on July 20, 2015 at 10:50pm

सबसे  कीमती  उपहार जो एक पिता अपने बेटे को दे सकता है वो है , उसकी माँ को प्यार और  इज्ज़त देना I बधाई  इस  सशक्त  रचना के लिए आ० राजेश कुमारी जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 20, 2015 at 9:45pm

विनय कुमार जी,आपका  बहुत- बहुत शुक्रिया लघु कथा आपको अच्छी लगी.  

Comment by विनय कुमार on July 20, 2015 at 5:37pm

अच्छी लघुकथा , बच्चे भी सब कुछ देखते , समझते हैं | बधाई आदरणीया राजेश कुमारी जी  .


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Comment by rajesh kumari on July 20, 2015 at 9:47am

आ० प्रदीप कुमार जी,आपका दिल से बहुत- बहुत  शुक्रिया. 


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Comment by rajesh kumari on July 20, 2015 at 9:46am

मिथिलेश भैया,लघुकथा के मुखर अनुमोदन  के लिए बहुत- बहुत आभार आपका. 


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Comment by rajesh kumari on July 20, 2015 at 9:45am

आ० धर्मेन्द्र जी, बहुत- बहुत शुक्रिया.  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 20, 2015 at 9:44am

लघु कथा  के  अनुमोदन  हेतु  आ० तेजवीर सिंह जी, आपका दिल से बहुत- बहुत  आभार|  

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