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भेड़िया, गिद्ध और कुत्ता

भेड़िए जैसे झपटते बच्चे

गिद्ध जैसे ताकते हुए

कुत्तों  की मानिंद

खाना छीनते हुए बच्चे

एक कूड़े के ढेर पर

मैंने देखे थे वो

भेड़िये ,गिद्ध और

कुत्ते जैसे बच्चे

इंसान का शेर या हाथी

जैसा होना सुहाता है

किन्तु भूख जब उसे भेड़िया,

गिद्ध या कुत्ता बना देती है

  और जब शिकार बचपन हो

तो आँखें शर्म से झुक जाती हैं

तब इस असमान बंटवारे पर

लज्जा आती है ,घृणा होती है

किसी ने तो खाना

बस फैंक दिया था

ज्यादा था उसके पास

या स्वाद नहीं था

या फिर  बस यूँ ही

और कुछ के पास

विकल्प ही नहीं है

खाने के ज्यादा या

बेस्वाद होने का

उनके लिए पेट में

धधकती आग एक प्रश्न है 

जिसे किसी भी तरह

बस बुझाया जाना है

फिर वह कूड़े में

पड़ी जूठन ही क्यों न हो

अबाध संवेदनहीन प्रचुरता

या कि अनवधि हीनता

दोनों ही मनुष्य को

भेड़िया, गिद्ध और

कुत्ता बना डालते है

मात्र सन्दर्भ अलग होते हैं I

                 

मौलिक व अप्रकाशित

 

 

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Comment

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Comment by Er Anand Sagar Pandey on August 11, 2015 at 1:27pm
परम आदरणीया तनुजा जी !
आपकी यह रचना पढकर मन व्याकुल हो उठा l
यही है हमारे समाज का सत्य l आपकी यह मर्मपर्शी रचना पढकर मन में आशा की एक किरण जाग उठी है l
सम्भवत: एक बदलाव देखने को मिले l
अद्वितीय रचना के लिये सादर बधाई स्वीकार करें l

कृपया ध्यान दे...

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