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kashma chahti hun aadarneey rajesh kumari ji ... darasal vah laghukatha itne farmeton me chhapkar prasarit ho chuki hai ki link dhoondh paana asambhav hai . sadar .
प्रिय शशि बंसल जी ,आपका कमेन्ट आज ही पढ़ा है सुनकर खराब लगा नेट पर इस तरह के लोगों की कमी नहीं जो दूसरों की रचनाएँ अपने नाम से या बेनाम इधर उधर पोस्ट कर देते हैं पोस्ट करें बेशक पर लेखक का नाम तो लिख दें |क्या आप कोई लिंक दे सकती है ?
"जिसके पैर मखमल पे खड़ें हों उसे भीख कौन देगा भला ।" धन दौलत के अहम पर चोट करती सुंदर लघु कथा
जिसके पैर मखमल पे खड़ें हों उसे भीख कौन देगा भला........ वाह....बहुत सार्थक लधुकथा हुई है यह .....बधाई स्वीकार करे आदरणीय़ शशि बंसल जी .
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