For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बीते लम्हें... /श्री सुनील

कभी-कभी मैं भी न! वक़्त की इस हरकत पर
टूटा-सा महसूस किया करता हूँ भीतर.
मेरे बीते हुए दौर का वही एक पल
छू देता है मुझे और मैं जाता हूँ ढल.

गया वक़्त लौटता नहीं ये कहा किसी ने
मानूँ मैं क्यों भला सताया जबकि इसी ने.
माज़ी के दख़्ल से ज़िन्दगी ये मेरी,अब
मौजूदा वक़्त भी भला जी पाती है कब.

समय छोङ कर गया, कि जिद्दी थे कुछ लम्हें
गये नहीं, ये बात यकींनन पता है तुम्हें.
क्या ये मुमकिन नहीं, लौट आओ तुम भी
वापस मेरे पास, अचानक हीं सही,कभी.


मौलिक व अप्रकाशित

Views: 175

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 17, 2015 at 7:21am

आदरणीय श्री सुनील भाई , सुन्दर भाव पूर्ण रचना हुई है , समय की धारा के साथ अगर भूत बह न पाये तो यही स्थित आ जाती है । आपको बधाइयाँ रचना के लिये

Comment by pratibha pande on September 16, 2015 at 9:26am

बीते लम्हे नहीं लौटते पर लफ़्ज़ों में उतार देने से उनकी कडवाहट कम हो जाती है और खूबसूरती दुगुनी और ये हुनर आपकी कलम बखूबी जानती है ,बधाई सुन्दर रचना के लिए आपको ,सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा भारत महान - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय विनय कुमार जी।लघुकथा पर आपकी उपस्थिति मेरे लिये गर्व की बात है।पुनः आभार।"
4 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post शृंगारिक दोहे :
"हार्दिक बधाई आदरणीय । बेहतरीन दोहे।"
6 hours ago
विनय कुमार commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा भारत महान - लघुकथा -
"बहुत बढ़िया रचना वर्तमान हालात पर आ तेज वीर सिंह जी, बहुत बहुत बधाई आपको"
6 hours ago
विनय कुमार commented on TEJ VEER SINGH's blog post बौना आदमी - लघुकथा -
"बहुत बढ़िया प्रेरक रचना आ तेज वीर सिंह जी, बहुत बहुत बधाई आपको"
6 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post ग़लतफ़हमी-लघुकथा
"इस सुंदर टिप्पणी के लिए आभार आ तस्दीक़ अहमद खान साहब"
6 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post ग़लतफ़हमी-लघुकथा
"इस सुंदर टिप्पणी के लिए आभार आ तेज वीर सिंह जी"
6 hours ago
narendrasinh chauhan commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी। बेहतरीन दोहे।"
6 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरा भारत महान - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान साहब जी।लघुकथा के मर्म को आपने बखूबी पहचाना।शुक्रिया।"
7 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - दिल मे भगवान का डर पैदा कर
"जनाब नवीन साहिब, अच्छी ग़ज़ल हुई है,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं  शेर 1_उला मिसरे में आपने की जगह…"
11 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post शृंगारिक दोहे :
"आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan  जी सृजन पर आपकी दिलकश प्रशंसा का दिल से आभार। "
12 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post शृंगारिक दोहे :
"आदरणीय  TEJ VEER SINGH जी सृजन पर आपकी दिलकश प्रशंसा का दिल से आभार। "
12 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"जनाब हरिओम साहिब, सुंदर कुंडली छंद हुए हैं मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं "
12 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service