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चलो! दुआ ये अभी बैठकर /श्री सुनील

1212 1122 1212 22/112

चलो! दुआ ये अभी बैठकर ख़ुदा से करें
कुछेक मुश्किलों के हल तो अब दुआ से करें.

वो अम्नो चैन यहाँ यूँ बह़ाल हों शायद
ख़िरद से काम लें गर बात क़ाइदा से करें.

अ़जीब नस्ल के इस दर्द पे कहा ये तबीब
अब ऐसे दर्द का दरमां भी किस दवा से करें.

ख़ुदा है सबपे, अगर सच यही है तो ऐ दिल!
चराग़ तू तो जला, बात क्या हवा से करें.

वो ख़ुशनिहाद है, ख़ुशदिल है, ख़ुशज़बाँ है तो
अब ऐसे शख्स का पैमाई किस उला से करें.

ख़ुशनिहाद - अच्छे स्वभाव वाला
उला- श्रेष्ठता, उम्दगी

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 608

Comment

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Comment by shree suneel on September 8, 2015 at 9:59pm
आदरणीय गिरिराज सर जी, ग़ज़ल पे उपस्थिति और इसकी सराहना के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया.
Comment by shree suneel on September 8, 2015 at 9:57pm
धन्यवाद आदरणीय रवि शुक्ला सर जी.
Comment by shree suneel on September 8, 2015 at 9:55pm
सराहना क्या लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय मिथलेश वामनकर सर जी.

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 7, 2015 at 9:14pm

आदरणीय श्री सुनील भाई , सभी अशआर बहुत ही खूबसूरत हुये हैं , पूरी गज़ल के लिये आपको बधाइयाँ ।

Comment by Ravi Shukla on September 7, 2015 at 2:53pm

आदरणीय सुनील जी बहुत खूब ग़ज़ल हुई है दाद कुबूल करें


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on September 5, 2015 at 8:41pm

आदरणीय सुनील जी बहुत ही शानदार ग़ज़ल कही है आपने. शेर दर शेर दाद सही मुबारकबाद कुबूल फरमाएं....

कृपया ध्यान दे...

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