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हिन्दी चमक रही है / गीत

भारत के अंबर पर देखो

सूर्य सी हिन्दी चमक रही है

माँ भारती के उपत्यका में

खुशबू बनकर महक रही है

 

विभिन्न प्रांतों का सेतुबंधन

सरल सर्वजन सर्वप्रिय है

दक्षिण से उत्तर पूर्व पश्चिम

दम दम दम दम दमक रही है

 

संस्कारों की वाहक हिन्दी

सभी भाषाओं में यह गंगा

प्रगति पथ पर नित आरूढ़ ये

पग नवल सोपान धर रही है

 

यूरोप अमेरिका ने माना

है यह भाषा समर्थ सक्षम

हम भारतियों के दिल में देखो

धड़कन बन कर धडक रही है 

नीरज कुमार नीर / मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 555

Comment

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Comment by Neeraj Neer on September 17, 2015 at 6:07pm

आपका हार्दिक आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी .... 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 17, 2015 at 1:43pm

अपनी हिंदी भाषा के सम्मान में सुन्दर रचना लिखी है बहुत बहुत बधाई आपको नीरज कुमार जी 

Comment by Neeraj Neer on September 16, 2015 at 9:57pm

हार्दिक आभार आदरणीय श्री सुनील जी इस उत्साहवर्धन हेतू ... 

Comment by Neeraj Neer on September 16, 2015 at 9:56pm

आपका हार्दिक आभार आदरणीय  amod bindouri जी ॥ 

Comment by shree suneel on September 16, 2015 at 7:48pm
हिन्दी के प्रति उत्तम उद्गार. अच्छी प्रस्तुति आदरणीय. बधाई आपको.
Comment by amod shrivastav (bindouri) on September 14, 2015 at 2:20pm
aa नीरज सर बेहद सुन्दर रचना
बधाई

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