For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तुम्हारें श्री मुख से
दो शब्द
निकले कि
मैंने कैद कर लिया
अपने हृदय उपवन में !!

अब हर रोज
दिल से निकाल
दिमाग तक लाऊँगी
फिर कंठ तक
फिर मुस्कराऊँगी
चेहरे पर
एक अलग सी
चमक बिखर जाएँगी
बार बार यही
दुहराती रहूंगी
क्योकि
अच्छी यादों को
बार-बार खाद-पानी
चाहिए ही होता है!!

और तब जाके
एक दिन
तैर जायेंगी
सरसराहट
बेकाबू हो
उड़ चलेगा
पूरा शरीर ही
हल्का-फुल्का हो
आकाश के उस पार !!

फिर तुम्हारें ही
महज दो बोल
भारी कर जायेंगे
मन को
और तत्क्षण
ला पटकेंगे मुझे
धरती पर !!

क्यों !
होता हैं न ऐसा
कभी कभी !!!

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 502

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by savitamishra on October 29, 2015 at 8:04pm

आभार आपका आदरणीया | सादर _/\_

Comment by pratibha pande on October 22, 2015 at 7:44pm

अब हर रोज 
दिल से निकाल 
दिमाग तक लाऊँगी 
फिर कंठ तक 
फिर मुस्कराऊँगी .....   कोमल नारी मन  थोड़े में ही खुश होकर उड़नेलगता है ,और फिर धडाम से नीचे भी आ जाता है ,  सुंदर रचना बनी है बधाई आपको आदरणीया सविता मिश्रा  जी 

Comment by savitamishra on October 22, 2015 at 6:36pm

बागी भैया आभार आपका तहेदिल से जो आपको पसंद आई |

Comment by savitamishra on October 22, 2015 at 6:36pm

ऐसा होता हिन् न दी कि कभी दो बोल हमे आसमा में पहुंचा देते और कभी धरा पर गिरा देते| बस मन में आती गयी.... वही लिख गए..|
शुक्रिया दिल से कांता दीदी आपको अच्छी लगी ये आपका बड़प्पन...वर्ना अपन को तो abcd भी न आती
सब सीखा-सीखा हार गए |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 22, 2015 at 8:58am

भावनाओं को सुन्दर अभिव्यक्ति मिली है, अच्छी कविता, बहुत बहुत बधाई आदरणीया सविता जी.

Comment by kanta roy on October 21, 2015 at 11:42pm

बार बार यही
दुहराती रहूंगी
क्योकि
अच्छी यादों को
बार-बार खाद-पानी
चाहिए ही होता है!!----बहुत खूब यादों की बात कही है आपने आदरणीय सविता जी। चाँद अच्छे पल जिंदगी भर के जीने के बहाने हो जाया करते हैं अक्सर। बधाई !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
57 minutes ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
20 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service