ऑफिस से आकर सबसे पहले टीवी ऑन किया तो गलती से दूरदर्शन लग गयाI इसे देख कर लगा की देश अपनी रफ़्तार से प्रगति कर रहा हैI चारों और शांति हैI सब अपना अपना काम कर रहे हैI हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब एकता की मिसाल दे रहे हैI और भारत दुनिया के अग्रसर देशो में शुमार होने जा रहा हैI लेकिन जैसे ही निजी न्यूज़ चेंनलो की और बढ़ा तो लगा, देश में साम्प्रदायक माहौल बिगड़ गया हैI चारो और हत्याए हो रही हैI हर जगह दंगे भड़क गए हैI चारो और धारा144 लगी हुई हैI सवर्ण दलितों को मार रहे हैI जगह जगह बलात्कार हो रहे हैI लोग भूखे मर रहे हैI महंगाई चरम सीमा पर हैI किसान आत्महत्याएं कर रहे हैI नेताओ के मुँह से अपशब्दों की बहार चल रही हैI लोग एक दूसरे को गालियाँ दे रहे हैI ये देख लगा एक दो दिन में एमरजेंसी लगने वाली हैI ऐसी हालत देखकर रहा नहीं गया और ताजा हालत जानने घर से निकला तो देखा चारो और सामान्य हालात है, सब कुछ शांति से चल रहा हैI मन में सोचा सब ठीक चल रहा है, तो फिर ये माहौल बिगाड़ने का काम कौन कर रहा हैI फिर अचानक ध्यान आया सूटकेस में भर कर आने वाले नोटों के साथ "नोट" की और जिस के मुताबिक देश का माहौल तैयार होता हैI "मौलिक व अप्रकाशित"
Comment
आदरणीय राहिला जी आप का बहुत बहुत, धन्यवाद
बहुत bdhiya कटाक्ष ....बहुत खूब
आदरणीय उस्मानी जी आप का बहुत बहुत धन्यवाद हौसला अफजाई के लिए
आदरणीय कल्पना भट्ट जी आप का बहुत बहुत धन्यवाद
आवश्यक सूचना:-
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |
© 2024 Created by Admin. Powered by
महत्वपूर्ण लिंक्स :- ग़ज़ल की कक्षा ग़ज़ल की बातें ग़ज़ल से सम्बंधित शब्द और उनके अर्थ रदीफ़ काफ़िया बहर परिचय और मात्रा गणना बहर के भेद व तकतीअ
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम साहित्यकारों व पाठकों का एक साझा मंच है, इस मंच पर प्रकाशित सभी लेख, रचनाएँ और विचार उनकी निजी सम्पत्ति हैं जिससे सहमत होना ओबीओ प्रबन्धन के लिये आवश्यक नहीं है | लेखक या प्रबन्धन की अनुमति के बिना ओबीओ पर प्रकाशित सामग्रियों का किसी भी रूप में प्रयोग करना वर्जित है |
You need to be a member of Open Books Online to add comments!
Join Open Books Online