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फेरे '

घर के काम से फ़ुरसत हो थोड़ा आराम करने जा ही रही थी , वक़्त बेवक्त घंटी के बजते ही मन में आया इस समय कौन होगा, अभी सूरज के आने का समय तो हुआ नहीं है, दरवाज़े पर पति को देख मैं चकित रह गई।
"अरे आप !!!!" पति को अचानक सामने ,पसीने से तरबतर देख ,अपने आप को बोलने से रोक ना पाई।
पानी लेने जा रही थी, सूरज ने हाथ पकड़ कर रोक लिया।
"तुमसे कुछ कहना है मुझे सुमन, मैं फिसल गया, रोशनी से संबंध बना बैठा , मुझे माफ़ करोगी ना मुझे हर सज़ा मंज़ूर है।
तुम्हारे,बच्चों के बिना नहीं रह सकता। अब सब छोड़ दुंगा।" वह फूट फूट कर रोने लगा।

"अरे क्या हुआ है, आपको कौन छोड़ रहा है, अर्धागिंनी हूं, मुझे सब पता है, पर भरोसा था, विवाह के सात फेरे तुम्है घर वापिस लायेंगे ।

नीता कसार जबलपुर

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Nita Kasar on December 29, 2015 at 12:57pm
आपका हार्दिक आभार आद०प्रतिभा पांडे जी ।दारोमदार दोनों पर है,सुबह का भूला शाम को घर वापस आ जाये तो उसे उसे भूला नही कहते है।पर यदि कोई एक भटके तो दूसरा उसे संभाल लें।पत्नि स्वार्थी नही होती वह दूरदृष्टि भी रखती है ।
Comment by Nita Kasar on December 29, 2015 at 12:50pm
कथा पर राय रखने के लिये,उत्साहवर्धन के लिये हार्दिक आभार आपका आद०आशतोष मिश्रा जी ।
Comment by pratibha pande on December 29, 2015 at 9:30am

 विवाह संस्था  मज़बूत होनी  ही चाहिए क्यों कि इससे सिर्फ दो व्यक्ति ही नहीं आने वाली पीढ़ी और स्वस्थ सामाजिक ढांचा भी जुड़ा है, ये बात भी सही है कि  इसका पूरा दारोमदार सिर्फ स्त्री पर ही क्यों ..?  आपकी कथा सोच को झंकझोरती है , बधाई आपको इस रचना पर आदरणीया  

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 28, 2015 at 8:14pm

आदरणीया नीता जी ..इस रचना के माध्यम से बिबाह संस्था के जड़ो की गहराई को जिस बेहतरीन तरीके से आपने इंगित किया है काबिले तारीफ़ है .....इस रचना पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by Nita Kasar on December 28, 2015 at 7:32pm
बिल्कुल पत्नि को घर निकाला मिलता सीता की तरह,कलयुग में सभी पति राम नही होते पर पत्नि सीता सरीखी चाहते है जो अग्नि परीक्षा देकर चरित्र साबित करें ।कथा पर राय रखने के लिये आपका ।
Comment by Nita Kasar on December 28, 2015 at 7:23pm
जी अमूमन पत्नि का उद्देश्य घर बचाना ही होता है इसलिये भरोसा करती है ।कथा पर उपस्थित हेतु हार्दिक आभार आद०सतविंदर कुमार जी ।
Comment by Pradeep kumar pandey on December 28, 2015 at 4:14pm

 एक प्रश्न पूछना चाहूंगा आदरणीय  Nita Kasar जी ,अगर इससे उलट पत्नी पति को बताती कि वो भटक गई थी तो पति का क्या जवाब होता , ?

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 28, 2015 at 12:44pm
सुंदर अभिव्यक्ति।ऐसा कमतर ही हो पाता है।बहुत ही उम्दा विषय चयन हुआ है,आदरणीया।

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