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भैंस का शाप - (हास्य कविता )

ब्रेकिंग समाचार
भैंस ने दूधिये कों मारी लात
दूध देने से किया इनकार
भ्रस्टाचार अब सहन नही
भैंस संघ का पलट वार

भैंस बोली सुनो ओ दूधिये
भ्रष्टाचार से तेरा गहरा नाता
देती मैं तुझको दूध खालिस
तू जी भर उसमे पानी मिलाता
चकित दूधिया पलट कर बोला
ये तों मेरा जन्म सिद्ध अधिकार
जानो वंशागत तेरी मेरी गति
सुन दूध देना तेरा है संस्कार
खालिस दूध कोई हजम न कर पाए
पी भी गया तों शीघ्र डाक्टर बुलवाए
दूधिया बोला सुन तू काली   भैंसी
न बन ज्यादा तेरी  ऐसी की तैसी
मारूंगा तुझको बगैर गिने सौ डंडा
जानूं मैं  रख तू अपना गंदा फंडा

तालाब पोखर नदी सब  सूखे पड़े
निर्मोही बादल न बरसने पर अड़े
नाली नल में पानी कहाँ से आता
झूठ बात बता पानी कैसे मिलाता
पलट भैंस बोली सुन ओ मुंशी
बताता श्रेष्ठ कुल अपना तू वंशी
मालिक है मेरा वो जगत कन्हाई
तू , तेरा जालिम इंजेक्शन कसाई
चूस लेता हड्डी से खून तक मेरा
खाने कों भी देता कर तेरा मेरा

समझ न खुद कों बड़ा  पाक साफ़
सब शून्य  यहाँ नहीकुछ भी हाफ
ईश्वर देगा तुझे जब कठोर दण्ड
डूबेगा सब कुछ हो कर खंड खंड

शाप तुझे देती मैं दिल से सुन
दुनियावी ताने बाने तू न बुन
रोग मधुमेह मिलेगा खानदानी
पड़े आजीवन इंसुलिन लगवानी

मौलिक /अप्रकाशित
प्रदीप कुशवाह
२६-५-२०१६

Views: 1029

Comment

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Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on May 28, 2016 at 9:49am
बहुत ही सुन्दर रचना बधाई स्वीकार करें
Comment by बशर भारतीय on May 26, 2016 at 10:44pm
आ. प्रदीप कुशवाहा जी भैंस और दूधिया के जरिये कई पहलुओं को आपने छुआ है अच्छी रचना हुई है बधाई आपको

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