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कलाधर छंद.....धन्यवाद ज्ञापन

कलाधर छंद............धन्यवाद ज्ञापन

(१)

 

धन्यवाद ज्ञाप  आज आपका विशेष  श्लेष वंदना करूं  यथा प्रणाम राम-राम है.

दूर - दूर से  यहां   पधार के  पवित्रता   सुमित्रता दिया  हमें  अवाम राम-राम है.

शब्द भाव भक्ति ज्ञान दे रहे सुवृत्ति मान सत्य सूर्य-चंद्र मस्त श्याम राम-राम है.

आपके सुयोग से   रचे गये सुपंथ मंत्र   भव्य का प्रणाम   ब्रह्म- धाम राम-राम है.

 

(२)

धन्य-धन्य भाग्य है कि धन्य है सुभारती कि धन्य स्थान काल दिव्य आरती उतारती.

शारदे सुब्रह्म शैव   शक्ति को बुला रही   कि व्यंजना प्रगीत –  गीत - छंद में संवारती.

आपकी  उदारता    महानता  विशुद्ध नीति    सूर्य के समान  नित्य    रोशनी  बिखेरती.

पाप - अंधकार आज  गर्त में समा रहे   कि प्रेम – भक्ति आपकी  प्रभात  को  उकेरती.

 

मौलिक व अप्रकाशित/

रचनाकार....केवल प्रसाद सत्यम

Views: 1317

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 30, 2016 at 7:24pm

आदरणीय रक्ताले भाई जी,  प्रणाम!  उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार. सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 30, 2016 at 7:23pm

आदरणीय गोपाल नारायण भाई जी,   उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार. सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 30, 2016 at 7:23pm

आदरणीय राम बली भाई जी    उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार. सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 30, 2016 at 7:22pm

आदरणीय श्याम नारायण भाई जी उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार. सादर

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 29, 2016 at 5:34pm

वाह ! कलकल प्रवाह लिए दोनों ही कलाधर छंद मन को मोहित कर रहे हैं भाई केवल प्रसाद जी. इस सुंदर सृजन के लिए बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर.

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 27, 2016 at 8:01pm

आ० केवल जी  आपका मात्रिक विन्यास मन मोह लेता है .

Comment by रामबली गुप्ता on May 27, 2016 at 2:56pm
बहुत ही बेहतरीन रचना आदरणीय। हृदय से बधाई स्वीकार करें।
Comment by Shyam Narain Verma on May 27, 2016 at 10:39am

बहुत सुंदर रचना बधाई आपको

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