For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक और प्रयास/सुरेश कुमार ' कल्याण '

करके याद हमें अब दिल जलाते हैं वो,
बेवफाई का मातम अब मनाते हैं वो।

हमारे बीते हुए लम्हों को याद कर,
अब अपना पल पल बिताते हैं वो।

जाहिर हो जाता है उनके चेहरे पे गम,
खुशी के लम्हे भी गम में बिताते हैं वो।

खुश नजर आने की कोशिश करते हैं मगर,
दिवानगी में दुःख की बात कह जाते हैं वो।

हमें तरस आता है उनकी हालत पर,
पर हमारे सामने आने से कतराते हैं वो।

रात में बिस्तर पर करवटें बदलते हुए,
फिर भी हमारी यादों में खो जाते हैं वो।

मौलिक व अप्रकाशित
सुरेश कुमार ' कल्याण '

Views: 1015

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on June 3, 2016 at 9:27am
आदरणीय श्री सुशील सरना जी बहुत बहुत धन्यवाद।आप यूँ ही मार्गदर्शन करते रहें हम कोशिश करते रहेंगे और आप महानुभावों के सहयोग से सीखने का प्रयास करते रहेंगे।
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on June 3, 2016 at 9:25am
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी बहुत बहुत धन्यवाद।
आप लोगों के सानिध्य में रहकर सीखने का प्रयास कर रहा हूं।
Comment by Sushil Sarna on June 2, 2016 at 6:51pm

आदरणीय सुरेश जी सुंदर प्रस्तुति  के लिए हार्दिक बधाई। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 2, 2016 at 6:36pm

आदरणीय सुरेश भाई , गज़ल कहने का प्रयास अच्छा हुआ है , बधाई आपको । मंच पर उपलब्ध , 'ग़ज़ल की बातें' के पाठों का अध्ययन करें अगर ग़ज़ल कहने की इच्छा हो तो और प्रयास जारी रखें ।

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on June 2, 2016 at 12:10pm
आदरणीया कान्ता राॅय जी अपने सुन्दर विचारों के लिए सादर आभार। प्रयास करूँगा और अधिक सीखने के लिए। बस आप यूँ ही स्नेह बनाये रखें।
Comment by kanta roy on June 2, 2016 at 11:28am
खुश नजर आने की कोशिश करते हैं मगर,
दिवानगी में दुःख की बात कह जाते हैं वो।....... वाकई में बहुत बढ़िया लिखते है आप । यहाँ मंच पर " गजल की बातें " ज्वाईन कीजिये ,बहर साधने और तक्तीया संबंध में बहुत जानकारी है जो आपकी गजल को दुरूस्त होने में मददगार साबित होंगी । वहाँ आप अपनी उलझनों को प्रश्नावली और प्रतिक्रियाओं में आये जबाव में मार्गदर्शन पा सकते है । फिर भी कोई दुविधा हो तो आप संबंधित प्रश्न वहाँ रख सकते है । सादर ।
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on June 2, 2016 at 9:03am
आदरणीय समर कबीर साहब व श्रद्धेय सौरभ पांडे जी मार्गदर्शन के लिए दिल की गहराईयों से धन्यवाद।
Comment by Samar kabeer on June 1, 2016 at 10:38pm
मिसाल के तौर पर अगर आपका मतला यूँ करें तो बह्र में हो जायेगा:-
"याद करके हमें दिल जलाते हैं वो
बेवफ़ाई का मातम मनाते हैं वो"

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 1, 2016 at 10:15pm

// मैं गजल के बारे में कुछ भी नहीं जानता। बस जो दिल में आता है उसे शब्दों में पिरोने की कोशिश करता हूं और जो बन जाता है उसे ही प्रेषित कर देता हूँ //

ऐसा नहीं है, आप कमसे कम काफ़िया और रदीफ़ के बर्ताव से बहुत कुछ परिचित हैं. आपकी परेशानी पंक्तियों (मिसरों) को सही ढंग से रखने को लेकर है. जिसे पंक्तियों को बहर में साधना कहते हैं. इसे ही जाँचने को तक्तीह करना कहते हैं. जो कि मैं और आदरणीय समर भाई आपसे पूछ रहे थे.

आप ऐसे मंच पर हैं जहाँ ग़ज़ल की विधा को लेकर बहुत से आलेख उपलब्ध हैं. आप उन आलेखों का एक-एक कर मनोयोगसे अध्ययन करें. आप यदि संयत ढंग से प्रयास करें तो आपको बहुत सफलता मिलेगी. उसके बाद इस मंचपर आदरणीय समर कबीर साहब जैसे कई गुणीजन हैं जो आपके उचित प्रश्नों का समुचित उत्तर दे सकते हैं.  फिर सारा कुछ आपके पक्ष में होता जायेगा. लेकिन बातवही है, आप कितना तैयार हैं और आप कितनी मेहनत करना चाहते हैं. 

शुभेच्छाएँ

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on June 1, 2016 at 9:53pm
श्रद्धेय सौरभ पांडे जी व श्रद्धेय समर कबीर साहब प्रणाम करता हूँ आप ज्ञानी जनों को। आदरणीय मैं गजल के बारे में कुछ भी नहीं जानता। बस जो दिल में आता है उसे शब्दों में पिरोने की कोशिश करता हूं और जो बन जाता है उसे ही प्रेषित कर देता हूँ। आगे पाठक पर निर्भर करता है कि वह इस का क्या अर्थ लेता है।मैं गजल के अरकान व पंक्तियों के वजन के बारे में कुछ नहीं जानता। टिप्पणी के लिए आपका हृदय की गहराईयों से धन्यवाद।कृपया इसी प्रकार अपना स्नेह बरसाते रहें।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
May 31
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
May 30
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
May 30
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
May 30
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
May 30

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service