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एक और प्रयास/सुरेश कुमार ' कल्याण '

करके याद हमें अब दिल जलाते हैं वो,
बेवफाई का मातम अब मनाते हैं वो।

हमारे बीते हुए लम्हों को याद कर,
अब अपना पल पल बिताते हैं वो।

जाहिर हो जाता है उनके चेहरे पे गम,
खुशी के लम्हे भी गम में बिताते हैं वो।

खुश नजर आने की कोशिश करते हैं मगर,
दिवानगी में दुःख की बात कह जाते हैं वो।

हमें तरस आता है उनकी हालत पर,
पर हमारे सामने आने से कतराते हैं वो।

रात में बिस्तर पर करवटें बदलते हुए,
फिर भी हमारी यादों में खो जाते हैं वो।

मौलिक व अप्रकाशित
सुरेश कुमार ' कल्याण '

Views: 988

Comment

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Comment by Samar kabeer on June 1, 2016 at 6:28pm
जनाब सुरेश कुमार कल्याण साहिब आदाब,आपने ग़ज़ल के अरकान नहीं लिखे,इसलिये कुछ कहना मुश्किल है, इस प्रस्तुति के लिये बधाई आपको ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 1, 2016 at 4:36pm

इस प्रस्तुति की पंक्तियों के वज़न भी लिख कर दें, आदरणीय सुरेश जी. ऐसा करना इस मंच की परिपाटी है. 

शुभेच्छाएँ

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