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तुम भावों की मधुर मधुर स्पन्दन सी ।
तुम तारों के झिलमिल झिलमिल आंगन सी ।
तुम तरुओं के खिलते नित नव पल्लव सी ।
तुम माँ की गोदी में शिशु के करलव सी ।

तुम मंदिर में देव को पूजा अर्पण सी ।
तुम पानी में चंद्रदेव के दर्पण सी ।
तुम प्रातः में विहगों के मधु गुंजन सी ।
तुम मृगया की मन हर लेती चितवन सी ।

तुम उपवन में मग्न मयूरी नर्तन सी ।
तुम प्रेमी के प्रमुदित प्रणय निवेदन सी ।
तुम रमणी की कोमल नव तरुणाई सी ।
तुम गर्मी की साँझ मंद पुरवाई सी ।

तुम चातक की स्वाति बूँद की अमृत सी ।
तुम बचपन की मधुर कहानी विस्मृत सी ।
तुम सुरभित फूलों की गूथी माला सी ।
तुम छलकाती मादकता मधुशाला सी ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज मिश्रा

Views: 281

Comment

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on June 26, 2016 at 9:40am
हार्दिक बधाई इस सुंदर रचना के लिए।
Comment by Shyam Narain Verma on June 23, 2016 at 3:11pm

खूबसूरत रचना के लिये आपको बधाई ॥

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