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मक्खियाँ (लघुकथा) राहिला

सौम्या की खास सहेली काफ़ी जतन के बाद भी लन्दन से शादी के एक दो दिन पहले ना पहुँच, ठीक उसी दिन पहुँच पायी।अपनी प्रिय सखी की पसंद को लेकर उसके मन में काफ़ी सवाल थे,जो मौका पाते ही निकल पड़े।

"तू बस एक वजह बता दे इस कोयले की खान से शादी करने की?"उसने एक नज़र स्टेज पर खड़े उसके दूल्हे डाल कर कहा।

"तमीज से बोल रमा!इतना तो याद रख ,तू मेरे पति के बारे में बात कर रही है।"

"अच्छा!!खूब ,जरा देख..,अपने पूरे कुटुंब को एक नज़र।इतनी हेठी शख्सियत तो तेरे ड्राइवर की भी नहीं।"

"शक्ल सूरत ही तो सब कुछ नहीं है।फिर शहर की  जानीमानी हस्तियों में गिनती है उनकी।और इन सब से अहम बात ये कि वो मुझसे बेइंतिहा मुहब्बत करते है, मेरी इज्जत करतेहै ।एक लड़की को और क्या चाहिए।" 

"मुहब्बत..!!, वो तो राकेश भी तुझसे बेपनाह करता था।उस जैसे सुंदर, सजीले नौजवान को तूने बिना बात ठुकरा दिया।जबकि शायद ही कॉलेज की कोई लड़की हो जो उसपर ना मरती हो।"

"इसी लिये तो, सारी उम्र भर उस गुड़ से मक्खियाँ कौन हटाता फिरता।मैं माँ की तरह सहनशील भी तो नहीं।"

स्टेज से दूर खड़े, महिलामित्रों से घिरे, अपने सुदर्शन पिता की ओर एक नजर फेंक कर वो बोली।

.

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Rahila on July 8, 2016 at 8:36pm

बहुत शुक्रिया आदरणीय परवेज साहब!आपको रचना अच्छी लगी जानकर बहुत ख़ुशी हुयी।सादर।

Comment by Parvez khan on July 8, 2016 at 8:15pm
आद.राहिला जी आपने बहुत ही खूबसूरत रचना लिखी साथ ही शीर्षक भी अच्छा चुना शिक्षाप्रद रचना बधाई हो
Comment by Rahila on July 3, 2016 at 11:47am
बहुत शुक्रिया आदरणीय दुबे सर जी!सादर नमन
Comment by Rahila on July 3, 2016 at 11:45am
आदरणीय उस्मानी जी!आपकी ख़ूबी ही ये है कि आपकी टिप्पणी ,रचना को इतने आयामों से स्पष्ट कर देती है कि विचार करने के लिए कई नए मुद्दे मिल जाते है।बहुत आभार ऐसी सुंदर प्रतिक्रिया के लिए। सादर
Comment by Rahila on July 3, 2016 at 11:10am
बहुत शुक्रिया आदरणीय श्रीवास्तव सर जी!आपकी रचना पर उपस्थिति ही मेरे लिए हर्ष का विषय है।सादर प्रणाम
Comment by Rahila on July 3, 2016 at 11:02am
बहुत शुक्रिया आदरणीया राजेश दीदी!आपकी स्नेहिल टिप्पणी पढ़ कर दिल बाग़, बाग़ हुआ।बहुत, बहुत आभार इतनी सुंदर प्रतिक्रिया के लिए।सादर
Comment by Rahila on July 3, 2016 at 10:58am
बहुत शुक्रिया आदरणीया नीता दीदी!आपकी सुंदर टिप्पणी ने मेरा हौसला ही बढ़ा दिया। सादर
Comment by Rahila on July 3, 2016 at 10:55am
बहुत शुक्रिया आदरणीया कल्पना दीदी!आपको रचना पसंद आई।मेरा लेखन सार्थक हुआ।सादर
Comment by Rahila on July 3, 2016 at 10:54am
बहुत शुक्रिया आदरणीय सुशील सर जी!सादर प्रणाम
Comment by Rajendra kumar dubey on July 3, 2016 at 10:51am
आदरणीय राहीला जी बहुत उम्दा विषय पर एक बेहतरीन लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई

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