For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रस्म ए उलफ़त की बात करते हैं

रस्म ए उलफ़त की बात करते हैं
हम मुहब्बत की बात करते हैं

वहशते ग़म के साथ रहके भी
हम मसर्रत की बात करते हैं

जो इशारे हैं उनकी आँखों के
सब शरारत की बात करते हैं

ज़िक्र होता है वस्ल का जब भी
वो क़यामत की बात करते हैं

पूछता है जो कोई हाले दिल
उसकी रहमत की बात करते हैं

दिल में क्या है बयां नहीं करते
बस सियासत की बात करते हैं

क्यूँ डरें इश्क़ में ज़माने से
हम बग़ावत की बात करते हैं

जो लुटेरे थे क्या हुआ उनको
क्यूँ हिफ़ाज़त की बात करते हैं

जिनको इल्मे वज़ू नहीं 'सूरज'
वो इबादत की बात करते हैं

डॉ सूर्या बाली 'सूरज'
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
1. उलफ़त =प्रेम 2. वहशते ग़म= दुख का डर 3. मसर्रत= खुशी 4. वस्ल= मिलन 5. रहमत= कृपा 6. सियासत= राजनीति 7. हिफ़ाज़त= सुरक्षा 8. इल्मे वज़ू = नमाज़ से पहले पानी से खुद को साफ करने का ज्ञान 7. इबादत = पूजा

Views: 449

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ravi Shukla on July 18, 2016 at 10:44am

आदरणीय डा सूर्या बाली जी  इस उम्‍दा गजल के लिये दाद और मुबारक बाद हाजिर है मकते के शेर से कई जाविये निकलते है  वाह जनाब बढि़या कहन है बधाई फिर से । साादर 

Comment by Manan Kumar singh on July 17, 2016 at 7:18pm
अच्छा कही आ.,बधाई अापको।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr Vandana Misra's blog post लघुकथा- खाली गमला
"आ. वंदना जी, अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई।"
43 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई चेतन जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
59 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मुफलिसी में ही जिसका गुजारा हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई बृजेश कुमार जी, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति व  उत्साह वर्धन के लिए धन्यवाद।"
1 hour ago
सचिन कुमार commented on सचिन कुमार's blog post ग़ज़ल
"मिन्हा शब्द तो उर्दू का ही है...एक ग़ज़ल में पढ़ा था ...ख्वाबों को आंखों से मिन्हा करती है...नींद…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मुफलिसी में ही जिसका गुजारा हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर पुनः उपस्थिति और मार्गदर्शन के लिए आभार।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on सचिन कुमार's blog post ग़ज़ल
"// क्या हम इसमे लाफ़ानी को 122 नही ले सकते है// 'लाफ़ानी' को 122 पर नहीं ले सकते…"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH left a comment for Saurabh Pandey
"जन्म दिन की हार्दिक बधाई आदरणीय सौरभ पांडे जी।"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on amita tiwari's blog post थाली खाली लघु -कथा
"हार्दिक बधाई आदरणीय अमिता तिवारी जी। बेहतरीन संदेश देती बढ़िया लघुकथा।"
1 hour ago
सचिन कुमार commented on सचिन कुमार's blog post ग़ज़ल
"ये मेरा पहला प्रयास था ...आप गुणी जनों इसे बस पढकर सार्थक कर दिया....समर सर मेरी गलतियों को गिनाने…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सचिन कुमार's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई सचिन जी, अच्छी गजजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
Chetan Prakash posted blog posts
3 hours ago
amita tiwari posted a blog post

थाली खाली लघु -कथा

    मेरे छोटे से बेटे तक  ने थाली सरका दी । कहा नहीं खाऊँगा  । इस खाने को उगाने वाले अन्नदाता यदि …See More
4 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service