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ग़ज़ल : नासूर है ...

फ़िक्रमंदों का अज़ब दस्तूर है 
ज़िक्र हो बस फिक्र का मंज़ूर है
 
जो कभी इक शे'र कह पाया नहीं 
वो मयारी हो गया मशहूर है
 
जो किसी परचम तले आया नहीं
वो नहीं आदम भले मजबूर है
 
मोड़ औ नुक्कड़ ज़हां के देख लो 
ये कंगूरा  तो बहुत मगरूर है
 
चन्द साँसों का सिला जो ये मिला 
चौखटों की शान का मशकूर है
 
ये कसीदे शान में किस की पढ़ें 
रोशनी की हर वज़ह बेनूर है
 
वो बहेगा दर्द देगा बारहा
फितरतन जो बस महज़ नासूर है   l

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Comment

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Comment by ASHVANI KUMAR SHARMA on May 18, 2011 at 6:04pm
shukriya pandey sir............hausala afzai ke liye

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 16, 2011 at 8:47am
//वो बहेगा दर्द देगा बारहा
फितरतन जो बस महज़ नासूर है //
इस नासूर की टीस को समझना किसी ग़ज़लगो के लिये फ़लसफ़ा है.. 
इस अंदाज़ के लिये बधाइयाँ.
Comment by ASHVANI KUMAR SHARMA on May 16, 2011 at 12:29am
sir hausala afzai ka shukriya
Comment by ASHVANI KUMAR SHARMA on May 16, 2011 at 12:29am
shukriya baagi ji
Comment by ASHVANI KUMAR SHARMA on May 16, 2011 at 12:28am
sangeeta ji abhaari hun
Comment by ASHVANI KUMAR SHARMA on May 16, 2011 at 12:28am
vandana ji abhaar

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Tilak Raj Kapoor on May 15, 2011 at 11:48pm
वाह जनाब, खूबसूरत अंदाज़ हे।

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 15, 2011 at 9:42pm
ये कसीदे शान में किस की पढ़ें 
रोशनी की हर वज़ह बेनूर है
बहुत खूब अश्वनी शर्मा जी , सभी शे'र अच्छे बन पड़े है , दाद कुबूल करे |
Comment by sangeeta swarup on May 15, 2011 at 7:54pm
चन्द साँसों का सिला जो ये मिला 
चौखटों की शान का मशकूर है
 
ये कसीदे शान में किस की पढ़ें 
रोशनी की हर वज़ह बेनूर है
खूबसूरत गज़ल 

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