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ए वतन /सुरेश कुमार ' कल्याण '

हम भारत के शूरवीर
जाने न देंगे कश्मीर
यह सिर का ताज हमारा है
हमें प्राणों से भी प्यारा है।
ठण्डी-ठण्डी इसकी हवाएँ
झर-झर बहते इसके झरने
हृदय सी गहरी वादियां इसकी
बड़े सुन्दर हैं इसके दर्रे
अखण्ड यह भारत सारा है
यह सिर का ताज हमारा है
हमें प्राणों से भी प्यारा है।
हम हिन्दू सिक्ख या मुसलमान हैं
हम सबका वतन हिन्दुस्तान है
हिन्दू मुस्लिम का ये किस्सा
नहीं हमारी संस्कृति का हिस्सा
ऊँच-नीच और जाति-पाति
फूटी आँख हमें न भाती
एक होकर हम रक्षा करेंगे
यही दृढ़ संकल्प हमारा है
यह सिर का ताज हमारा है
हमें प्राणों से भी प्यारा है।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by अलका 'कृष्णांशी' on October 16, 2016 at 9:18pm

वाह्ह्ह बेहतरीन भाव है रचना के ,आदरणीय  सुरेश कुमार 'कल्याण ' जी बधाई। 

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on October 15, 2016 at 7:50pm
श्रद्धेय समर कबीर साहब आदाब । रचना अनुमोदन के लिए और रचना को सम्मान देने के लिए हार्दिक आभार । सादर ।
Comment by Samar kabeer on October 13, 2016 at 2:57pm
जनाब सुरेश कुमार 'कल्याण'जी आदाब,बहुत सुंदर भाव,अच्छी रचना हुई,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

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