For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गजल(इश्क को तोलते हैं कहाँ)

212 212 212
इश्क को तोलते हैं कहाँ,
जो तुले,बोलते हैं कहाँ?1

सिसकियाँ हों बँधी गाँठ में,
बावरी! खोलते हैं कहाँ?2

ऐ हवा! तू उड़ा के चुनर
पूछ, हम डोलते हैं कहाँ?3

गम पिये बस जिये अब तलक,
हम जहर घोलते हैं कहाँ?4

चूमते धड़कनें चाव से,
खुद कभी बोलते हैं कहाँ?5
मौलिक व अप्रकाशित@मनन

Views: 371

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Manan Kumar singh on February 19, 2017 at 9:30pm
आदरणीय गिरिराज भाई,आपकी प्रेरणा परक टिप्पणी हमेशा फलदायी रही है आपका दिली आभार व्यक्त करता हूँ,सादर।
Comment by Manan Kumar singh on February 19, 2017 at 9:29pm
आदरणीय महेंद्र कुमार जी,गजल आपको पसंद आयी,यह रचना के लिए मान की बात है।आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 19, 2017 at 8:56pm

आदरनीय मनन भाई , क्या बात है , बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है , बधाइयाँ .....आपको ।

Comment by Mahendra Kumar on February 19, 2017 at 11:59am
बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय मनन जी। हार्दिक बधाई प्रेषित है। सादर।
Comment by Manan Kumar singh on February 17, 2017 at 7:19am
आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय सौरभ पांडेय जी,सादर।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 16, 2017 at 11:54pm

दिल से बधाई लीजिए आदरणीय मनन जी. बहुत खूब ! 

सिसकियाँ हों बँधी गाँठ में,
बावरी! खोलते हैं कहाँ? ................ कमाल साहब, कमाल !

Comment by Manan Kumar singh on February 16, 2017 at 9:26pm
आपका आभार आदरणीय आशुतोष मिश्र जी।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on February 16, 2017 at 8:33pm
आदरणीय मनन जी इस रचना पर हार्दिक बधाई सादर
Comment by Manan Kumar singh on February 15, 2017 at 7:39pm
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी नमन!आपकी शेर दर शेर सराहना गजल की लघुता को मन-ग्राहकता बख्शतीं है,सादर।
Comment by Manan Kumar singh on February 15, 2017 at 7:37pm
आदरणीय समर साहिब नमस्ते!आपके अनुमोदन से गजल का मान बढ़ा है,सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

SALIM RAZA REWA posted blog posts
55 minutes ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post उसका हक़- लघुकथा
"इस उत्साह बढ़ाने वाली टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ बृजेश कुमार 'ब्रज' साहब"
16 hours ago
Manan Kumar singh posted a blog post

ग़ज़ल(ग़ज़ल बेबहर है...)

122  122  122  122गजल बेबहर है, नदी बिन लहर है कहो,क्या करूँ जब बिखरता जहर है?1कहूँ क्या भला मैं?…See More
21 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

चंद क्षणिकाएँ :

चंद क्षणिकाएँ :मन को समझाने आई है बादे सबा लेकर मोहब्बत के दरीचों से वस्ल का पैग़ाम…See More
21 hours ago
Dr. Geeta Chaudhary posted a blog post

क्षणिकाएं: विछोह

1. ये यादों का अकूत कारवां है,   नित बेहिसाब चला पर वही खड़ाI2. तेरी हाथों की लकीरों का दोष,   या…See More
21 hours ago
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"आपका जितना आभार मैं प्रकट करू, कम है बस आपको सादर प्रणाम करता हूँ सुझावों पर काम करता हूँ हार्दिक…"
yesterday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post बीरबल की खिचड़ी(लघु कथा)
yesterday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post बातचीत(लघु कथा)
yesterday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post बातचीत(लघु कथा)
yesterday
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"आपका जितना आभार मैं प्रकट करू, कम है बस आपको सादर प्रणाम करता हूँ सुझावों पर काम करता हूँ हार्दिक…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्यनारायण जी, आपकी रचना के लिए आपका सादर धन्यवाद.  आपने इस बार की विभीषिका का…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 102 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा जी, आयोजन में आपकी उपस्तिथि प्रतीक्षित थी। इस बार के आयोजन के दोनों छंदों में आपकी…"
Sunday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service