For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल (निगाहों से आँसू निकलते रहे )

ग़ज़ल
-------
(फऊलन -फऊलन -फऊलन -फअल )

क़ियामत की वो चाल चलते रहे |
निगाहें मिलाकर बदलते रहे |

दिखा कर गया इक झलक क्या कोई
मुसलसल ही हम आँख मलते रहे |

यही तो है गम प्यार के नाम पर
हमें ज़िंदगी भर वो छलते रहे |

मिली हार उलफत के आगे उन्हें
जो ज़हरे तअस्सुब उगलते रहे |

तअस्सुब की आँधी है हैरां न यूँ
वफ़ा के दिए सारे जलते रहे |

असर होगा उनपर यही सोच कर
निगाहों से आँसू निकलते रहे |

था तस्दीक़ शाना किसी गैर का
जहाँ बैठ कर वो उछलते रहे |

(मौलिक व अप्रकाशित )

Views: 984

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 20, 2017 at 10:51pm

मुहतरम जनाब मोहित साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाइ
का बहुत बहुत शुक्रिया , महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 20, 2017 at 9:13pm

मुहतरम जनाब सत्विन्दर कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी --

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on March 19, 2017 at 9:48pm
आदरणीय तस्दीक अहमद खां जी,बेहतरीन अशआर हुए हैं,हार्दिक बधाई
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 17, 2017 at 9:04pm

मुहतरम जनाब ब्रजेश . कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 17, 2017 at 9:04pm

मुहतरम जनाब सत्विन्दर कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 17, 2017 at 9:03pm

मुहतरम जनाब राघव साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---
जनाब ग़ज़ल तो ग़ज़ल होती है वो न कभी बदली है और न बदलेगी
अगर इसे बदलने की कोशिश की गयी तो वो ग़ज़ल नहीं रह सकती
मेरे हिसाब से मिसरा मुकम्मल है बदलाओ की ज़रूरत नहीं है ----सादर

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 17, 2017 at 8:56pm

मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---आपके मशवरे का शुक्रिया
मिसरा तो यही है " तअस्सुब की आँधी है हैरां न यूँ " आप ने जैसा कहा
वैसा भी हो सकता है ---सादर

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 17, 2017 at 8:50pm

मुहतरम जनाब सुशील सरना साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 17, 2017 at 8:49pm

मुहतरम जनाब रवि साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 17, 2017 at 8:48pm

मुहतरम जनाब आरिफ़ साहिब आदाब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और
हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
yesterday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
yesterday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service