For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

क़दम उठाने से पहले विचार करना था

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन

(आख़री शैर में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ नज़र अंदाज़ करें और शैर का लुत्फ़ लें)

अगर वफ़ा का चलन इख़्तियार करना था
क़दम उठाने से पहले विचार करना था

ये एक बार नहीं बार बार करना था
बग़ैर नाव के दरिया को पार करना था

हुसूल-ए-इल्म की ख़ातिर भटकते फिरते हैं
ग़ज़ल का फ़न जो हमें बा वक़ार करना था

उठाके बोझ ज़माने का तेरी चाहत में
शऊर-ओ-फ़िक्र की सरहद को पार करना था

वो मेरी तेग़ से मरता तो क्या मज़ा आता
उसी के तीर से उसका शिकार करना था

__________

हुसूल-ए-इल्म :- ज्ञान प्राप्त करना
शऊर :- अक़्ल
तेग़ :- तलवार

--समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 329

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on July 9, 2017 at 11:55pm
जनाब नवीन जी आदाब, सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Naveen Mani Tripathi on July 9, 2017 at 8:41pm
वाह सर क्या खूब लिखा । लाजबाब ग़ज़ल हुई । बधाई आपको ।
Comment by Samar kabeer on June 26, 2017 at 5:58am
जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on June 26, 2017 at 5:55am
जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by vijay nikore on June 24, 2017 at 11:19am

//उठाके बोझ ज़माने का तेरी चाहत में
शऊर-ओ-फ़िक्र की सरहद को पार करना था

वो मेरी तेग़ से मरता तो क्या मज़ा आता
उसी के तीर से उसका शिकार करना था//

सभी शेर बहुत अच्छे हैं, और यह और भी मन-पसंद हैं। दिल से बधाई, समर जी।

Comment by Naveen Mani Tripathi on June 14, 2017 at 10:45am
वाह वाह बहुत खूब सर ।
Comment by Samar kabeer on May 15, 2017 at 5:48pm
जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Mahendra Kumar on May 15, 2017 at 10:45am

हमसे पूछो कि ग़ज़ल मांगती है कितना लहू

सब समझते है ये धन्‍धा बड़े आराम का है

-राहत इन्दौरी 

हम से पूछो कि ग़ज़ल क्या है,ग़ज़ल का फ़न क्या
चन्द लफ़्ज़ों में कोई आग छुपा दी जाये

-जाँ निसार अख़्तर

लोग आसान समझते हैं ग़ज़ल गोई को
दिल का शीराज़ा बिखरता है ग़ज़ल कहने में

-नरेश कुमार शाद

हुसूल-ए-इल्म की ख़ातिर भटकते फिरते हैं
ग़ज़ल का फ़न जो हमें बा वक़ार करना था

-समर कबीर 

वाह! यह सिर्फ ओबीओ पर ही संभव है. जय-जय. 

Comment by Mahendra Kumar on May 15, 2017 at 10:28am

//ये एक बार नहीं बार बार करना था, बग़ैर नाव के दरिया को पार करना था// वाह! क्या ख़ूब शेर कहा है आपने आदरणीय समर कबीर सर. इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाई प्रेषित है. सादर. 

Comment by Samar kabeer on May 12, 2017 at 5:53pm
मोहतरमा कल्पना भट्ट साहिबा आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Mohammed Arif commented on SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR's blog post चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है
"आदरणीय सुरेंद्र कुमार शुक्ल जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन और सामयिक रचनाएँ हैं । हर बुराई का अंत होना…"
4 minutes ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल--बह्र फेलुन×5+फा
"दाद-ओ-तहसीन का बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय विजय निकोर जी ।"
13 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । लगता है आपने ग़ज़ल जल्दबाज़ी…"
16 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय नादिर खान जी आदाब, शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी…"
17 minutes ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय महेंद्र जी , उम्दा ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनाएं.  सादर"
18 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय अजय तिवारी जी आदाब, हर शे'र माक़ूल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल…"
21 minutes ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय सलीम साहब, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनाएं. सादर "
23 minutes ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय गोपाल नारायण जी, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनाएं. सादर "
26 minutes ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीया राजेश कुमारी जी, उम्दा ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनाएं. 'इक नामचीन शह्र में बदनाम हो…"
31 minutes ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय सुरेन्द्रनाथ जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनाएं. सादर "
35 minutes ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय तस्दीक साहब, अच्छी ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनाएं. सादर "
39 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"मेरे कहे को मान देने के लिए धन्यवाद आपका ।"
40 minutes ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service