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ग़ज़ल - तेरी महफ़िल में दीवाने रहेंगे

1222 1222 122

शमा के पास परवाने रहेंगे ।
तेरी महफ़िल में दीवाने रहेंगे ।।

तुम्हारी शोखियाँ कातिल हुई हैं ।
तुम्हारे खूब अफ़साने रहेंगे ।।

बना देंगे नया इक ताज़ हम भी ।
हमें जब हाथ कटवाने रहेंगे ।।

तुम्हारी बज्म में आता रहूँगा ।
खुले जब तक ये मैखाने रहेंगे ।।

जिसे है फिक्र दौलत की नहीं अब ।
उसी के साथ याराने रहेंगे ।।


तुम्हारी शोखियाँ कातिल हुई हैं ।
तुम्हारे खूब अफ़साने रहेंगे ।।

बड़ा इल्जाम फिर लगने लगा है ।
हजारों जख्म पहचाने रहेंगे ।।

हवाओं में गजब खुशबू है उसकी ।
कहाँ तक लोग अनजाने रहेंगे ।।

चुरा लेते हैं अक्सर लोग दिल को ।
अभी पहरे पे कुछ थाने रहेंगे ।।

हमें है याद उसका हर तरन्नुम ।
हमारे साथ नज़राने रहेंगे ।।

न् जाओ इस तरह से छोड़ कर अब ।
कई कूचे तो वीराने रहेंगे ।।

छलकती मय का जादू जब तलक है।
नज़र के पास मस्ताने रहेंगे ।।
---- नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित
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Comment by Naveen Mani Tripathi on June 24, 2017 at 11:46pm
आ0 आरिफ साहब तहे दिल से शुक्रिया ।
Comment by Mohammed Arif on June 24, 2017 at 11:05pm
आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, बहुत अच्छी ग़ज़ल । दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।

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