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"अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा"

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन

अगर वो मुफ़लिसी को रौनक़-ए-बाज़ार कर देगा
कई महरुमियों को बर सर-ए-पैकार कर देगा

सभी ने कर लिया इक़रार, लेकिन जानता है वो
अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा

किताबों में लिखा है उसको जन्नत की बशारत है
वफ़ा की राह में क़ुर्बान जो घर बार कर देगा

मिलाएगा अगर हर बात में जो हाँ में हाँ उसकी
उसे नीलाम वो इक दिन सर-ए-बाज़ार कर देगा

हमारे इश्क़ का चर्चा अभी सरगोशियों तक है
जो बाक़ी काम है वो सुब्ह का अख़बार कर देगा

पुराने ज़ख़्म दिल के भर चुके,अब देख लेना वो
हमारे वास्ते पैदा नया आज़ार कर देगा

अगर आमाल की उसके मज़म्मत की नहीं हमने
हमारा साँस लेना भी "समर"दुश्वार कर देगा
----
महरूमी-ना उमीदी,मायूसी,नाकामी
बर सर-ए-पैकार-जंग के लिए तैयार
बशारत-ख़ुश ख़बरी
सर गोशियों-काना फूसी
आज़ार-दुख, तकलीफ़
आमाल-अमल का बहुवचन
मज़म्मत-निंदा

समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on November 25, 2017 at 9:04pm
जनाब सुरेन्द्र कुमार शुक्ला जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on November 25, 2017 at 4:48pm

जनाब समर जी बेहद उम्दा  गजल। .उर्दू के लफ्ज कभी हमें परेशान करते हैं कम ज्ञान जो है  फिर भी आनंद लेता हूँ। .बधाई 

भ्रमर ५ 

Comment by Samar kabeer on November 4, 2017 at 10:11pm
जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Hariom Shrivastava on November 4, 2017 at 10:00pm
वाहह,वाहहहहह,लाजवाब गजल। सभी ख्याल एक से एक बढ़कर।
Comment by Samar kabeer on November 4, 2017 at 9:58pm
जनाब जयनित कुमार मेहता जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on November 4, 2017 at 9:57pm
जनाब डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on November 4, 2017 at 9:55pm
जनाब बलराम जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on November 4, 2017 at 9:54pm
जनाब गजेन्द्र जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on November 4, 2017 at 9:52pm
जनाब मनोज कुमार अहसास साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on November 4, 2017 at 9:51pm
जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिए आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

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